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Wednesday, 24 October 2018

लघु एवं कुटीर उद्योग, लघु उद्योग के बारे में जानकारी, घरेलू उद्योग, लघु उद्योग लिस्ट laghu udyog and kutir udyog in Hindi,small business in hindi


"कुटीर उद्योग" सामूहिक रूप से उन उद्योगों को कहते हैं जिनमें उत्पाद एवं सेवाओं का सृजन अपने घर में ही किया जाता है न कि किसी कारखाने में। "कुटीर उद्योगों" में कुशल कारीगरों द्वारा कम पूंजी एवं अधिक कुशलता से अपने हाथों के माध्यम से अपने घरों में वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। भारत में प्राचीन काल से ही "कुटीर उद्योगों" का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। अंग्रेजों के भारत आगमन के पश्चात् देश में कुटीर उद्योगों तेजी से नष्ट हुए एवं परम्परागत कारीगरों ने अन्य व्यवसाय अपना "लघु उद्योग"  (छोटे पैमाने की औद्योगिक इकाइयाँ/small scale industry) वे होती है जो मध्यम स्तर के विनियोग की सहायता से उत्पादन प्रारम्भ करती हैं। इन इकाइयों मे श्रम शक्ति की मात्रा भी कम होती है और सापेक्षिक रूप से वस्तुओं एवं सेवाओं का कम मात्रा में उत्पादान किया जाता है। ये बड़े पैमाने के उद्योगो से पूंजी की मात्रा, रोजगार, उत्पादन एवं प्रबन्ध, आगतोंएवं निर्गतो के प्रवाह इत्यादि की दृष्टि से भिन्न प्रकार की होती है। ये "कुटीर उद्योगों"  से भी इन आधारों पर भिन्न होती हैं- ...



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हर कोई व्यक्ति अपने जीवन के एक निश्चित ौवनं  सुनिचित समय के पश्चात उस दौर में पहुँचता है जहां  वह पैसा कमाने का काबिल बाण जाता है  या जयादा  से जयादा  धन  कामना चाहता है। लघु एवं कुटीर उद्योग, लघु उद्योग के बारे में जानकारी, घरेलू उद्योग, लघु उद्योग लिस्ट

बहुत सरे आजकल के युआ बहुत अपना समय बिना कुछ किये अपना समय बिता देते है अपने सक्छम के जाने बिना  
और यहां पर बहुत सरए युआ 


 आजकल के युवाओ का कुछ नया करने का  सकरात्मक जूनून देखते ही बनता है। 


 पर ये ज़रूरी नहीं है की  सवी युआ  यापप्पार सुरु करें  हर के जिंदिगी में अपनी सोच के साथ हर कुछ करने की आजादी है  उनमे से हिन् कई 


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इंसान  बिज़नेस को चुनता है 
यदि कोई  मुझसे व् पूछे तो मई व् बिज़नेस हिन् चूस करूँगा 
पर 
हम सब नया बिज़नस शुरू करने के लिए सक्षम हो और अगर नए बिज़नस की शुरुवात कर भी लेते है बिना कोई स्किल के तो ये व् नकरात्मक ही परिणाम देगा ,बिज़नेस में निरंतरता रखना बहुत हिन् जरुरी जो इसम अदिकतर लोग इसमें खड़े नहीं हो पते है 
और बहुत कोई हो व् जाते है ये एक सकरात्मक सोच की फाल है

क्या आप अपना न्य बिज़नेस सुरु करना कहते हैं?
मेरे सोच के लिए एक बहुत ही ाचा और साहसिन विचार है मई हमेशा इस तरह के लोगो को सपोर्ट करता हूँ  
जैसे की

  
 अगर कोई व्यक्ति अपना खुद का उद्योग शुरू करना चाहता है तो
 उसके लिए ज़रूरत होती है
१.एक अछि सोच की 
२.एक अच्छे आईडिया की।
३.फिर  अच्छी प्लानिंग की 
४.और धन की वि 



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बहुत सरे बड़े बिज़नेस करने को ेशुइक होते है बहुत कोई छोटे बिज़नेस करने के लिए दोनों में सिर्फ सोच की फरक हाउ 

स्माल बुसिनेस लघु  उद्योग

लघु उद्योग (छोटे पैमाने की औद्योगिक इकाइयाँ) वे होती है

 जो मध्यम स्तर के विनियोग की सहायता से उत्पादन प्रारम्भ करती हैं। इन इकाइयों मे श्रम शक्ति की मात्रा भी कम होती है और सापेक्षिक रूप से वस्तुओं एवं सेवाओं का कम मात्रा में उत्पादान किया जाता है। ये बड़े पैमाने के उद्योगो से पूंजी की मात्रा, रोजगार, उत्पादन एवं प्रबन्ध, आगतों एवं निर्गतो के प्रवाह इत्यादि की दृष्टि से भिन्न प्रकार की होती है।


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लघु उद्योगों के उद्देश्य:

लघु उद्योगों का मुख्य उद्देश्य रोजगार के अवसरों में वृद्धि करते हुए बेरोजगारी एवं अर्ध बेरोजगारी की समस्या का समाधान करना है क्योंकि लघु उद्यमों के श्रम प्रधान होने के कारण उनमें विनियुक्त पूंजी की इकाई अपेक्षाकृत अधिक रोजगार कायम रखती है।

दूसरा मुख्य उद्देश्य आर्थिक शक्ति का समान वितरण करना है। कुटीर व लघु उद्योगों से आर्थिक सत्ता का विक्रेन्द्रीयकरण होता है।
आम जनता को श्रेष्ठ वस्तुएं उपलब्ध कराना इनका मुख्य उद्देश्य है।
श्रम प्रधान तकनीक के कारण श्रमिकों की बहुतायत रहती है। अतः आवश्यक है कि वे औद्योगिक शांति की स्थापना करें।


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लघु उद्योगों के माध्यम से देश की सभ्यता एवं संस्कृति सुरक्षित रहती है। अधिकाशतः लधु उद्योगों द्वारा कलात्मक एवं परम्परागत वस्तुओं का निमार्ण किया जाता है एवं अधिकांशतः ये उद्योग श्रम प्रधान तकनीक पर आधारित होते है जिससे उद्योगों में पारस्परिक सद्भावना सहकारिता, समानता एवं भ्रातृत्व की भावना को बल मिलता है।
लघु उद्योगों का मुख्य उद्देश्य है कि वे प्राकृतिक साधानों का अनुकूलतम उपयोग करें।
मानवीय मूल्यों की दृष्टि से ‘सादा जीवन उच्च विचार’ की भावना का सृजन करें।
व्यापार संतुलन एवं भुगतान संतुलन को अनुकूल बनाने हेतु आवश्यक है कि ये अत्याधिक विदेशी मुद्रा का अर्जन करें।
भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए इनका उद्देश्य अधिक से अधिक श्रेष्ठ उत्पादन करना है।


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यहाँ हम कुछ लघु उद्योगों की सूची दे रहे है जिससे आप अपना स्वयं का व्यवसाय का शुभारंभ कम राशि में भी कर सकते है:

laghu udyog video








                                      लघु उद्योग लिस्ट

लेखन सामग्री का उत्पादन

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(क) स्लेट-पेन्सिल
कच्चा माल (Raw Material)
चॉक बनाने के यन्त्र
उत्पादन विधि (Manufacturing Process)
चॉक की पैकिंग
मशीन एवं उपकरण (Machinery & Equipment)
(ख) स्लेट-पेन्सिल (Slate- Pencil)
स्लेट पेन्सिल बनाने की मशीन
स्लेट पेन्सिल बनाने की विधि
मशीनरी एवं उपकरण (Machinery & Equipment)
आय-व्यय (Cost Estimation) वार्षिक: स्लेट पेन्सिल (Slate- Pencil)

(ग) पेस्टल कलर (Pastel Colours)
मोमी कलर पेस्टल

मोमों का मिश्रण
विभिन्न रंगों के पेस्टल के लिए – जिंक व्हाइट, लीथोपीन,
क्ले करल पेस्टल

(घ) दर्जियों के चॉक (Tailors Chalk)
दर्जियों के चॉक का फार्मूला
मशीनरी एवं उपकरण (Machinery & Equipments)
वित्तीय परियोजना (Cost Estimation) वार्षिक: टेलर-चॉक (Tailors Chalk)
(ङ) ऑफिस पेस्ट (Office Paste)
चिपकने वाले पदार्थ का फामॅूला
(च) ऑफिस गम (Office Gum)
मशीनरी एवं उपकरण (Machinery & Equipments)
ऑफिस पेस्ट व ऑफिस गम



ITEMS-LIST-UNDER-LAGHU-UDYOG-IN-HINDI


वित्तीय परियोजना (Cost Estimation) वार्षिक : ऑफिस पेस्ट एवं गम

आयुर्वेदिक फार्मेसी (Ayurvedic Pharmacy)
आयुर्वेदिक औषधियों के समूह

आयुर्वेदिक औषधि बनाने की योजना
गुणवत्ता/मानक (Standard)
आधार और अनुमान
आयुर्वेदिक औषधियां निर्माण करने का लागत मूल्य (अनुमानित)


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सौंदर्य व श्रृंगार प्रसाधन उद्योग

1. एम्लशन (Emulsion)
2. पाउडर (Powder)
3. स्टिक्स (Sticks)
4. केक (Cake)
5. ऑयल (Oil)
6. म्युसिलेज (Mucilage)
7. जैली (Jelly)

8. सस्पेन्शन (Suspension)
9. पेस्ट (Paste)
10. सोप (Soap)
11. घोल (Solution)



LAGHU UDYOG KYA HAI?


सौंदर्य प्रसाधनों का वर्गीकरण (Classification of Cosmetics)

(i) चर्म के लिए (For Skin)
(ii) बाल के लिए (For Hair)
(iii) नाखून के लिए (For Nails)
(iv) दात और मुंह के लिए (For Teeth & Mouth)
(v) बोर्डलाइन तथा किन-रेड प्रोडक्ट्



LOW INVESTMENT WITH BUSINESS IDEAS IN HINDI - बिज़नेस से जुडी जानकारी


(क) फेस पाउडर (Face Powder)
कच्चा माल (Raw Materials)
उत्पादन विधि (फेस पाउडर)
सफेद फेस पाउडर बेस के फार्मूले

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 लघु एवं कुटीर उद्योग, लघु उद्योग के बारे में जानकारी, घरेलू उद्योग, लघु उद्योग लिस्ट


कर्मचारी, पर्याप्त साधन तथा संगठन जिसके अंतर्गत व्यवसाय की गतिविधियां संचालित की जाती है।
     1   एकल स्वामित्व
     2   भागीदारी
     3   सीमित दायित्व वाली कम्पनी
     4   सहकारी संस्थाएं
     5   विशेष विक्रय अधिकार

एकल स्वामित्व एक मात्रा व्यापारी के रूप में जाना जाता है। स्वामित्व एक व्यापारिक इकाई का प्रकार है, जो एक व्यक्ति द्वारा चलाया जाता है। एकल स्वामित्व में मालिक और व्यापार में कोई कानूनी अंतर नहीं होता है।
एकल स्वामित्व में उद्यमी स्वयं सभी लाभ प्राप्त करता है तथा सभी घाटे और कर्ज के लिए भी जिम्मेदार होता है। व्यवसाय की प्रत्येक सम्पत्ति तथा ऋण उद्यमी/स्वामित्व के होते हैं। एकल स्वामित्व के अंतर्गत उद्यमी अपने कानूनी नाम के अलावा व्यवसाय के नाम का उपयोग कर सकते हैं।
·      छोटे स्तर पर उद्यम/व्यवसाय शुरू करना आसान होता है।
·      व्यवसाय शुरू करने तथा चलाने के लिए छोटी मात्रा में पूंजी आवश्यक है।
·      अपने स्वयं के दिशा निदेशों पर इच्छानुसार उद्यम व्यापार चला सकते हैं।
·      कर निर्धारण की दृष्टि से आय के विरुद्ध कुछ व्यापारिक खर्च दिखाए जा सकते हैं।
·      उद्यम व्यापार का कोई भी पहलू सार्वजनिक नहीं होता।
·      यदि एक से अधिक उद्यम व्यापार करते हैं तो एक उद्यम व्यापार का घाटा दूसरे उद्यम व्यापार के मुनापेफ से घटाया जा सकता है। उद्यमी व्यापार के सभी लाभ स्वयं प्राप्त कर सकता है।
एक व्यापारिक संगठन जिसमें दो या दो से अधिक व्यक्ति मिलकर व्यापार का प्रबंधन तथा संचालन करते हैं तथा समान रूप से व्यापारिक लाभों एवं ऋण के लिए उत्तरदायी होते हैं। साझेदार कहलाते हैं। साझेदारी में संसाधनों के एकत्रीकरण से जहां पूँजी अधिक उपलब्ध होती है वहीं व्यापार को कुशलता से चलाने वाले एकाधिक स्वामी भी मिलते हैं तथा किसी भागीदार के बीमार पड़ने पर भी व्यापार सुचारू रूप से चल सकता है।
यदि किसी भागीदार ने किसी नुकसानदायक अनुबंध पर जानते हुए या न जानते हुए दस्तखत कर दिये तो भागीदारी का प्रत्येक सदस्य उसके दुष्परिणामों को भुगतने के लिये बाध्य होगा। इस गंभीर परिस्थिति में साखदारों द्वारा अपन कर्ज के भुगतान के लिये अन्य सदस्यों की संपत्तियाँ उनका कोई दोष न होते हुए भी जब्त की जा सकती है तथा यदि कोई भागीदार व्यक्तिगत रूप से दिवालिया हो जाता है तो किसी भी कारण से उसका भागीदारी में हिस्सा ऋणदाताओं द्वारा जब्त किया जा सकता है। व्यक्तिगत तौर पर अन्य सदस्य दिवालिया हुए भागीदार की देनदारियों के प्रति जवाबदेह नहीं हैं लेकिन बाहरी हस्तक्षेप से व्यवसाय को बचाने के लिये अन्य समय में दिवालिया भागीदार की हिस्सेदारी खरीदना अन्य सदस्यों व व्यवसाय को आर्थिक तंगी में डाल सकता है। यहां तक कि मृत्यु भी सक्षम सदस्य को भागीदारी नियमों से मुक्ति नहीं देती और उसकी संपत्ति तथापि देय बनी रह सकती है। अपने व्यावसायिक संबंधों को वैधानिक रूप से सूचित करके और सार्वजनिक रूप से भागीदारी व्यवसाय में से अपना रिटायरमेन्ट घोषित न किया जाये तब तक अनिश्चित रूप से जवाबदेही लागू रहती है।
भागीदारी अधिनियम के प्रमुख प्रावधान निम्नानुसार हैं:
·      सभी भागीदार समान रूप से पूँजी निवेश करते हैं।
·      सभी भागीदार समान रूप से लाभ-हानि बांटते हैं।
·      किसी भी भागीदार सदस्य की पूंजी पर कोई ब्याज नहीं दिया जाता है।
·      किसी भी भागीदार को वेतन नहीं मिलता।
·      व्यवसाय के परिचालन में सभी भागीदारों को समान तरजीह मिलेगी।
यह भी संभव होता है कि उपरोक्त एवं अधिनियम के अन्य कुछ प्रावधान सभी के लिये अनुकूल नहीं होते। अतः ऐसी स्थिति में व्यवसाय के प्रारंभ में ही सालिसिटर द्वारा भागीदारी अनुबंध बनवा लेना उचित होता है।
·      स्वयं तथा सदस्यों द्वारा पूंजी निवेश से अधिक पूंजी की उपलब्धता।
·      व्यवसाय को पूर्णतया स्वतंत्रा रूप से चलाने का आत्मविश्वास न हो तो अन्य सदस्यों के साथ जिम्मेदारियां बांटी जा सकती हैं।
·      एक से अधिक विशेषज्ञता व दक्षता प्राप्त होती है। कोई भागीदार वित्तीय व्यवस्थाओं में कुशल हो सकता है तो कोई प्रबंधन में या इसी प्रकार अन्य व्यवस्था भी हो सकती है।
सीमित दायित्व वाली कम्पनी में जितनी पूँजी शेयर के माध्यम से निवेशित की जाती है दायित्व केवल उस सीमा तक ही सीमित होते हैं। कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत कंनी का अपने शेयरधारकों, संचालकों व प्रबंधकों से अलग अस्तित्व होता है। शेयर धारकों की जवाबदारी जारी की गई शेयर कैपीटल की दत्त अथवा अदत्त राशि तक ही सीमित होती है। कंपनी का अस्तित्व असीमित काल के लिये हो सकता है और इसमें शेयरधारकों की संख्या पर कोई सीमा नहीं होती। कंपनी अधिनियम द्वारा कंपनियों पर कई प्रकार के नियम लागू किये गये हैं। कंपनी को कुछ निश्चित बहीखाते बनाना, अंकेक्षक नियुक्त करना और कंपनी रजिस्ट्रार के पास वार्षिक विवरणी जमा करने के साथ संचालकों व देनदारियों, संपत्तियों व बंधक ऋण की जानकारी जमा करना अनिवार्य होता है। कंपनी को अस्तित्व में आने के लिये कम से कम तीन शेयर धारक एवं उनमें से एक प्रबंध संचालक होना चाहिये। कंपनियों के भी दो प्रकार होते हैं। प्रथम वह जिसे ‘पब्लिक लिमिटेड कंपनी’ कहा जाता है। इसमें पंजीकृत एवं एलौट की जाने वाली शेयर पूँजी की निम्नतम सीमा तय होती है। यह कंपनी अपने मेमोरेन्डम ऑफ एसोसिएशन के प्रावधानों के तहत जनता को अपने शेयर खरीदने के लिये आमंत्रित कर सकती है। दूसरे प्रकार में वह कंपनियां आती हैं जो सार्वजनिक क्षेत्रा की नहीं होतीं। अर्थात जो कंपनियां पब्लिक कंपनियां नहीं हैं उन्हें दूसरे वर्ग में रखा जाता है और वे निजी या प्राइवेट कहलाती हैं। सार्वजनिक कंपनियों पर कई प्रकार के प्रतिबन्ध एवं कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने की बाध्यता होती है। सामान्यतया अधिकांश कंपनियां अपनी शुरूआत प्राइवेट कंपनी के तौर पर करती हैं और पब्लिक कंपनियों में केवल तभी परिवर्तित होती हैं जब उन्हें शेयरधारकों के बड़े समूह से अधिक पूँजी की आवश्यकता होती है। कंपनियों को अपनी योग्य आय पर कर चुकाना होता है।
·      सदस्यों ;संचालक व शेयर धारकद्ध की वित्तीय देनदारी केवल उतनी ही रकम तक सीमित होती है जितनी उन्होंने शेयर के लिये दी हो।
·      प्रबंधन का ढांचा बिल्कुल स्पष्ट होता है जिससे नियुक्तियों, सेवानिवृत्ति या संचालकों को हटाने की प्रक्रिया सरल व नियमानुसार हो जाती है।
·      यदि अतिरिक्त पूँजी की आवश्यकता हो तो इसकी पूर्ति निजी रूप से और अधिक शेयर बेचकर की जा सकती है।
·      अधिक सदस्यों को शामिल करना आसान होता है।
·      किसी भी सदस्य की मृत्यु, दिवालिया होना या कंपनी छोड़ना कंपनी के व्यापार के क्रिसाकलापों को प्रभावित नहीं करता।
·      व्यवसाय के किसी भाग को बेचना आसान होता है।
·      इन कंपनियों की साख व प्रतिष्ठा बहुत ज्यादा होती है।
 कंपनी के नाम में लिमिटेड शब्द अवश्य जुड़ा होना चाहिये। कंपनियों की पंजीकरण संस्था इस बात पर विशेष ध्यान देती है कि किसी भी विद्यमान कंपनी से मिलता जुलता या वैसा ही नाम नई कंपनी का न हो। कुछ शब्द जैसे राष्ट्रीय या संस्थान केवल विशेष परिस्थितियों में ही उपयोग किये जा सकते हैं।
 जिस जगह से व्यवसाय चलाया जाये वही संस्था का पंजीकृत कार्यालय हो यह आवश्यक नहीं है। रजिस्टर्ड कार्यालय अधिकांशतः संस्था के या अकाउण्टेन्ट का पता होता है। यह वह पता होता है जहां से सभी कार्यालयीन पत्राचार होता है।
कम से कम दो शेयरधारकों का होना कंपनी के लिये अनिवार्य होता है। इन्हें ‘सदस्य’ या ‘निवेशक’ भी कहा जा सकता है निजी कंपनी में पचास की संख्या तक शेयरधारक हो सकते हैं।
कंपनी के लिये यह परम आवश्यक है कि उसके पास अधिकृत एवं घोषित शेयर कैपीटल हो जो निश्चित रकम के शेयर में विभाजित हो। छोटी कंपनियां सामान्यतया 100 रुपये की नाममात्रा पूँजी के साथ अस्तित्व में आती हैं।
यह कंपनी का मूल प्रपत्रा होता है। इसमें कंपनी से संबंधित सभी जानकारी जैसे नाम, पंजीकृत कार्यालय का पता, शेयर पूँजी, दायित्वों की सीमा एवं सर्वाधिक महत्वपूर्ण रूप से कंपनी स्थापित करने का उद्देश्य वर्णित होता है। कंपनी के 75 प्रतिशत सदस्यों की संख्या कभी भी कंपनी के उद्देश्यों को बदल सकती है। यह धारणा भी गलत है कि यदि कंपनी के उद्देश्य को बदल सकती है। यह धारणा भी गलत है कि यदि कंपनी के उद्देश्य अनुच्छेद में वर्णित व्यवसाय के प्रकार से हटकर काम करती है तो कंपनी के संचालकों की इस बारे व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी। संस्थापन प्रलेख अथवा मेमोरेन्डम ऑफ एसोसिएशन पर कम से कम तीन शेयरधारकों के हस्ताक्षर होने चाहिये।
 इस प्रपत्रा में कंपनी की आंतरिक नियमावली दी होती है। कंपनी को शेयरधारकों से संबंध और व्यक्तिगत यप से शेयरधारकों के आपसी संबंध किस प्रकार होंगे, यह इसमें वर्णित होता है। कई कंपनियां अपना स्वयं का आर्टिकल न बनाते हुए कंपनी अधिनियम में दिये हुए प्रारूप में ही संशोधन करके उसे अपना लेती हैं।
यह वह दस्तावेज होता है जिसे मेमोरेन्डम तैयार होने व नाम तय हो जाने के बाद कंपनी रजिस्ट्रार जारी करता है। इस दस्तावेज को प्राप्त करने के बाद कंपनी वैधानिक रूप से अस्तित्व में आ जाती है और व्यापार शुरू कर सकती है।
प्रत्येक कंपनी को एक सुयोग्य लेखा परीक्षक की नियुकित करना अनिवार्य होता है। जिसका कर्तव्य होता है कि वह कोषपाल को यह बताये कि बहीखाते लेखा सिद्धांतों के अनुसार चल रहे हैं या नहीं। कंपनी की बैलेन्स शीट तथा लाभ-हानि खाता कंपनी की वास्तविक स्थिति को दर्शाते या नहीं दर्शाते हैं तथा ये सभी दस्तावेज कंपनी अधिनियम के अनुसार बने हैं। लेखा परीक्षकों की नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति सामान्य सभा में होती है जिसमें वार्षिक लेखा विवरण प्रस्तुत किया जाता है।
अधिनियम द्वारा बहीखातों के निर्माण व तौर तरीकों के बारे में सख्त नियम बनाये गये हैं। प्रत्येक कंपनी को रिकार्ड बनाना व उसे नियमित बनाये रखना जरूरी है जो किसी समय विशेष पर वांछनीय अचूकता के साथ कंपनी की वित्तीय स्थिति दर्शा सके। इन बहीखातों में लाभ-हानि खाते के साथ बैलेन्स शीट एवं अंकेक्षक तथा संचालका की रिपोर्ट संलग्न होती है। एक नई कंपनी की लेखा अवधि इसकी वैधानिक स्थापना के दिन से शुरू होकर नियमानुसार 31 मार्च तक होती है। यदि कंपनी इस अवधि के बारे में रजिस्ट्रार के पास स्पष्टीकरण दे दे तो यह बढ़ भी सकती है। किसी भी लेखा अवधि के समाप्त होने के दस माह के भीतर खातों की एक अंकेक्षित प्रति शेयर धारकों के सामने सामान्य सभा में तथा एक प्रति कंपनी रजिस्ट्रार के पास जमा करना अनिवार्य है।
लेखा बही के साथ कंपनी को उसके सदस्यों के विवरण का रजिस्टर, संचालकों एवं सचिवों का रजिस्टर, शेयर हस्तांतरण का रजिस्टर, ऋण दाताओं;डिबेन्चर होल्डरद्ध का रजिस्टर बनाना अनिवार्य है।
सभी कंपनियों के पास अपनी एक मुहर होनी चाहिये जो अनिवार्य रूप से शेयर सर्टिपिफकेट पर दर्ज हो तथा जब भी कंपनी कोई करार करती है तो उस पर सील का लगा होना जरूरी होता है।
सहकारी संस्था एक कानूनी इकाई है जो स्वामित्व और लोकतांत्रिक तरीके से अपने सदस्यों के द्वारा नियंत्रित होती है। इनके सदस्यों का अक्सर उद्यम के साथ अपने उत्पादों या सेवाओं के निर्माता या उपभोक्ताओं के रूप में या इसके कर्मचारियों के रूप में निकट सम्बन्ध होता है। सहकारी संस्थाएं एक अधिनियम के तहत संचालित होती है जिसके प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं;
·      सहकारी संस्था के प्रत्येक सदस्य को एक आदमी-एक मत के सिद्धान्तानुसार समान नियंत्राण का अधिकार होता है।
·      वांछित योग्यता पूर्ण करने पर सदस्यता सबके लिये खुली होना चाहिये।
·      मुनापेफ को संस्था के व्यवसाय में ही लगाया जा सकता है या पिफर सदस्यों की सक्रियता एवं कार्य के अनुपात में बांटा भी जा सकता है।
·      ऋण या शेयर पूँजी पर ब्याज एक-निश्चित सीमा तक ही देय होता है भले ही संस्था त्रौमासिक ब्याज देने में समर्थ क्यों न हो।
सहकारिता का यह ढांचा संस्था को एवं सदस्यों को अधिकतम मुनापफा व स्वतंत्राता देने की दृष्टि से वैधानिक नहीं है। यदि यही व्यवस्था अपनानी हो तो संस्था को कंपनी रजिस्ट्रार के पास पंजीकृत कराया जा सकता है। कम से कम सात सदस्य होने चाहिये जो शुरू में पूर्णकालिक कर्मचारी न हों लिमिटेड कंपनी की ही तरह एक पंजीकृत सहकारी संस्था को अपने सदस्यों के प्रति सीमित दायित्व होता है। इसे भी वार्षिक लेखा दाखिल करना अनिवार्य होता है। लेकिन इसके लिये इन पर कोई शुल्क नहीं है। सभी सहकारी संस्थाएं पंजीकरण कराना जरूरी नहीं समझतीं क्योंकि यह कानूनन अनिवार्य नहीं है। ऐसे में इन्हें असीमित दायित्व के साथ साझेदारी के रूप में कानूनी दृष्टि से वर्गीकृत किया जाता है।
इसके अंतर्गत एक अन्य फर्म के सपफल व्यापार मॉडल का उपयोग किया जाता है। विशेष विक्रय अधिकार स्वामित्व एवं रोजगार के बीच की स्थिति होती है। इसके एक छोटे व्यवसाय को चलाने के सभी आकर्षण जहां मौजूद हैं वही अवांछित नुकसान या खतरे से बचने की भी व्यवस्था हो जाती है। उदाहरणार्थ लघु व्यवसाय के पूरे क्षेत्रा की तुलना में विशेष विक्रय अधिकार देने वाले और लेने वाले का असपफलता अनुपात बहुत कम है।
डिस्ट्रीब्यूटरशिपः यह किसी विशेष उत्पाद के लिये हो सकती है। कई बार इसे एक एजेन्सी के तौर पर भी समझा जाता है। लेकिन इन दोनों अवधारणाओं में अन्तर है। एक एजेंट अपने प्रदाता के पक्ष पर कार्य करता है। भले ही उसके पास एक से अधिक वस्तुओं व सेवाओं की एजेंसी हो। जो एक एजेंट किसी तीसरे पक्षकार को बताता, दिखाता या प्रदर्शित करता है वह उसके नियोक्ता के लिये बाध्यता होती है। डिस्ट्रीब्यूटरशिप एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें दोनों पार्टियां कानूनन स्वतंत्रा हैं जैसे एक विक्रेता और खरीददार होते हैं। अपेक्षित केवल इतना होता है कि खरीददार या डिस्ट्रीब्यूटरशिप लेने वाला विक्रेता या डिस्ट्रीब्यूटरशिप देने वालों की प्रचार-प्रसार, विपणन, स्टापफ के प्रशिक्षण इत्यादि सुविधाओं के प्राप्त करने के बाद कुछ विशेष क्षेत्रीय अधिकारों के विनियम के साथ पर्याप्त स्टॉक बनाये रखें तथा अपने प्रतिष्ठान का रखरखाव इस प्रकार करेगा जिससे विक्रेता के उत्पाद या सेवा की गुणवत्ता श्रेष्ठ प्रदर्शित होती है।
उत्पादन के लिये लाइसेन्सः यह किसी क्षेत्रा में किसी समय के अन्तराल में उत्पाद विशेष के लिये लागू होता है। लाइसेन्स प्राप्त करने वाला इसमें निहित किसी भी गोपनीय प्रक्रिया को हासिल व इस्तेमाल कर सकता है तथा उत्पाद के नाम के लिये बिक्री पर रॉयल्टी भी प्राप्त कर सकता है। वैसे तो लाइसेन्स देने वाला और प्राप्त करने वाला एक दूसरे से स्वतंत्रा हैं सिवाय इस बात के कि लाइसेन्स हासिल करने वाला देने वाले के उत्पाद की छवि श्रेष्ठ बनाये रखे।
व्यापार चिन्ह का इस्तेमालः इसमें किसी व्यक्तिगत नाम के स्थान पर कुछ लाइसेन्स के तहत एक बहुप्रचारित व लोकप्रिय उत्पाद का पफीस के बदले व्यावसायिक इस्तेमाल किया जाता है।
अधिकार देने वाले को यह लाभ होता है कि उसे व्यापारिक प्रतिष्ठान में कोई सीधा निवेश नहीं करना पड़ता, जबकि नाम उसी का होता है। काम आने वाले उपकरण एवं सामग्री प्रेफन्चाइजी लेने वाले के होते हैं। सर्वाधिक अनुकूल जगहों की अब अनुपलब्धता के कारण प्रेफन्चाइजी के नाम पर लीज हासिल करने का चलन प्रेफन्चाइजर्स में बढ़ रहा है। प्रेफन्चाइजर की वित्तीय तरलता का नई शाखाएं खोलने में बड़ा विलक्षण प्रभाव पड़ता है। यद्यपि प्रेफन्चाइजर को प्रेफन्चाइजी नियुक्त करने, निगरानी करने व अन्य कार्यक्रमों में भारी खर्च आता है तथापि इसके प्रभाव में कोइ्र कमी नहीं देखी गई है। इसके बाद भी ऐसे मामलों में प्रेफन्चाइजी को कई प्रकार की सुविधाएँ व सेवाएं देनी पड़ती हैं जैसे शोध एवं अनुसंधान, प्रबन्धन में सहायता, आपस में जानकारियों का आदान-प्रदान इत्यादि। इन सबके लिये भी प्रेफन्चाइजर पर खर्च आता है। इस सारे निवेश के उपरांत प्रेफन्चाइजर यह अपेक्षा करता है कि व्यापार का स्वामी होने के नाते प्रेफन्चाइजी स्थानीय बाजार की आवश्यकताओं व परिस्थितियों के प्रति अधिक सजग होगा और ज्यादा से ज्यादा व्यापार करने की कोशिश करेगा। इससे प्रेफन्चाइजी की आय जहां बढ़ेगी वहीं प्रेफन्चाइजी से मिलने वाला हिस्सा भी प्रेफन्चाइजर को बढ़कर मिलेगा। इस प्रकार बिना किसी प्रत्यक्ष निवेश के प्रेफन्चाइजर व्यापार विस्तार का साथ प्राप्त कर सकता है।
Safe meat & milk
Safety matches
Safety Pins (and other similar products like paper pins, staples pins etc.)
Sanitary Plumbing fittings
Sanitary Towels
Scientific Laboratory glasswares (Barring sophisticated items)
Scissors cutting (ordinary)
Screws of all types including High Tensile
Sheep skin all types
Shellac
Shoe laces
Shovels
Sign Boards painted
Silk ribbon
Silk Webbing
Skiboots & shoes
Sluice Valves
Snapfastner (Excluding 4 pcs. ones)
Soap Curd
Soap Liquid
Soap Soft
Soap washing or laundary soap
Soap Yellow
Socket/pipes
Sodium Nitrate
Sodium Silicate
Sole leather
Spectacle frames
Sports shoes made out of leather (for all Sports games)
Stapling machine
Surgical Gloves (Except Plastic)
Table knives (Excluding Cutlery)
Tack Metallic
Taps
Tarpaulins
Teak fabricated round blocks
Tent Poles
Tentage Civil/Military & Salitah Jute for Tentage
Textiles manufacturers other than N.E.C. (not elsewhere classified)
Tiles
Tin Boxes for postage stamp
Tin can unprinted upto 4 gallons capacity (other than can O.T.S.)
Tin Mess
Toggle Switches
Toilet Rolls
Trays for postal use
Trolley
Trollies - drinking water
Tubular Poles
Tyres & Tubes (Cycles)
Umbrellas
Utensils all types
Valves Metallic
Varnish Black Japan
Voltage Stablisers including C.V.T's
Washers all types
Water Proof Covers
Water Proof paper
Water tanks upto 15,000 litres capacity
Wax sealing
Waxed paper
Wheel barrows
Whistle
Wicks cotton
Wing Shield Wipers (Arms & Blades only)
Wire brushes and Fibre Brushes
Wire Fencing & Fittings
Wooden Boxes and Cases N.E.C. (Not elsewhere classified)
Wooden Chairs
Wooden Flush Door Shutters
Woollen hosiery
Zinc Sulphate
Zip Fasteners

बिंदी बनाने की प्रक्रिया जानें


बिंदी बनाना एक सरल प्रक्रिया है। महिलाओं की आबादी सजावटी डिजाइनर बिंदी के साथ परंपरागत कुमकुम जगह ले ली है। बिंदी उपयुक्त चिपकने के साथ मखमल कपड़े का एक छोटा सा टुकड़ा है। यह अलग अलग रंग, आकार और चित्रों में उपलब्ध है। व्यापार अपेक्षाकृत कम स्टार्टअप पूंजी के साथ आधारित घर के रूप में शुरू किया जा सकता है। बिंदी एक उपभोज्य उत्पाद है और ग्रामीण और शहरी दोनों महिलाओं की आवश्यकता है। उत्पाद की मांग मौजूद हैं और महिलाओं की जनसंख्या की वृद्धि के साथ बढ़ता है। कुछ सरल मशीनरी की स्थापना करके किसी भी व्यक्ति बिंदी बनाने व्यवसाय शुरू कर सकते हैं और इस कारोबार से बाहर सुंदर पैसा कमा सकते हैं।

India में Bindi Making business से शायद हर कोई शख्स वाकिफ होगा,क्योंकि हर किसी ने किसी न किसी को माथे पर बिंदी लगाये हुए जरुर देखा होगा | बिंदी बनाना यानिकी Bindi Making एक बेहद ही आसान प्रक्रिया है, भारतीय परम्परा के अनुसार बिंदिया जहाँ महिलाओं के माथे की  शोभा बढाती है, वही यह भी माना जाता है, की इसको माथे पर लगाने से सुहागिन पत्नियाँ अपने पति की अच्छे स्वास्थ्य एवं लम्बी उम्र की कामना करती हैं | कहते हैं की ऋग्वेद में बिंदी का जिक्र बिंदु नाम से किया गया है, इसके अलावा यह भी कहा जाता है की माथे के बीचोबीच जहाँ बिंदी लगाईं जाती है उसे छठा चक्र, अजना  या फिर  गुप्त ज्ञान की जगह भी कहा जाता है, माना यह भी जाता है की माथे पर बिंदी उर्जा को बनाये रखने एवं एकाग्रता को मजबूत करने का काम भी करती है | इसलिए औरतों की साजो सज्जा सामग्री में बिंदी का महत्वपूर्ण योगदान है | Bindi Making business starting process पर बात करने से पहले यह जान लेते हैं की आखिर यह business है

 क्या? और यह व्यापार करके किस तरह से Kamai की जा सकती है |

बिंदी बनाने की प्रक्रिया जानें:

हम यहाँ पर यह स्पष्ट कर दें की बिंदी एक लाल रंग की या अन्य किसी रंग की गोल आकार का एक बिंदु होता है | लेकिन वर्तमान में इसका आकार सिर्फ गोल न होकर अलग अलग आकारों में भी चलन में है | बिंदी माथे के बीचोबीच लगाई जाती है शुरुआत में इसका चलन सिर्फ लाल रंग से हुआ था इसके पीछे कुछ  लोगों का मानना था की लाल रंग शक्ति का प्रतीक होता है तो वही कुछ लोग लाल रंग को प्यार, एवं स्नेह का प्रतीक मानते थे | वर्तमान में बिंदी फैशन के अनुसार लगाई जाती है, अर्थात किसी खास रंग के पहनावे पर किसी खास रंग और आकार की बिंदी को उपयोग में लाया जाता है, यही कारण है की इस Bindi Making business में और अधिक आकारों एवं रंगों का उद्गम हुआ है या हम कह सकते हैं की बिंदी मखमली कपडे का एक बहुत ही छोटा हिस्सा होता है, जिसमे कुछ और कलाकारी कर उसे माथे के बीचोबीच लगाया जाता है | लेकिन वर्तमान में शादी विवाह जैसे आयोजन में बिंदियों से चेहरे को माथे से लेकर गालों तक सजाया जाता है | जहाँ तक Bindi making business का सवाल है विभिन्न आकार प्रकार की बिंदियों का निर्माण जब उन्हें बेचकर Kamai करने हेतु किया जाता है, तो इस प्रकार किया जाने वाला बिज़नेस Bindi Making business कहलाता है |

बिंदी बनाने के उद्योग की शुरुआत कैसे करे:

जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की बिंदियाँ विभिन्न आकार, प्रकार रंग एवं कलाकृतियों से परिपूर्ण बाज़ार में उपलब्ध होती हैं | Bindi Making business start करने की चाह रखने वाला उद्यमी इस Business को बहुत कम Investment के साथ कुटीर उद्योग के रूप में Home से भी Start कर सकता है |  जहाँ तक इस बिज़नेस में Market Scope का सवाल है उसके बारे में हमारा सिर्फ यही कहना है ही की बिंदी एक उपभोज्य (Consumable) वस्तु है ( Consumables से हमारा आशय उस वस्तु से है जिसका उपयोग सिर्फ एक बार करके उसे फेंक दिया जाता है और उसकी जगह नई वस्तु का उपयोग किया जाता है) | जिसका उपयोग सभी जगह अर्थात ग्रामीण इलाकों एवं शहरों में किया जाता है, इसके अलावा समाज में बेटे और बेटीयों के प्रति समानता वाली सोच भी इस बिज़नेस को बढ़ने में सहायक सिद्ध होगी, क्योंकि इस Business की अंतिम ग्राहक महिलाएं है और एक महीला एक दिन में 2-3 बिंदी तक का उपयोग करती है, एक आंकड़े के मुताबिक औसतन एक साल में एक व्यक्ति बिंदी के 10 packets उपयोग में लाता है |  यही कारण है की इसकी मांग Market में हमेशा बनी रहती है | तो आइये जानते हैं की Bindi Making business की Starting कैसे करें |

बिंदी बनाने के कारोबार पंजीकरण:

छोटे पैमाने पर व्यापार बिंदी बनाने की शुरुआत में, यह एक एक व्यक्ति कंपनी (ओपीसी) के रूप में शुरू करने के लिए सलाह दी जाती है। आरओसी के साथ रजिस्टर। स्थानीय प्राधिकारी से ट्रेड लाइसेंस प्राप्त करते हैं। आप एक मौजूदा बैंक खाते की आवश्यकता होगी। बिक्री कर पंजीकरण के लिए आवेदन। आप लघु उद्योग इकाई के रूप में अपने व्यापार को पंजीकृत कर सकते हैं।

बिंदी बनाने के कच्चे माल और प्रक्रिया फ्लो चार्ट:

मुख्य कच्चा बिंदी निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री मखमल कपड़ा है। अन्य कच्चे माल के लिए आवश्यक विभिन्न पत्थर, चिपकने वाला, गोंद और अन्य उपभोज्य की तरह सजावटी आइटम हैं। आप ग्राहक की मांग के अनुसार पैकेजिंग सामग्री की व्यवस्था करने की आवश्यकता होगी।

Bindi टुकड़े की मदद से काटने अलग पेपर शीट पर चिपकाया जाता है के द्वारा पीछा कपड़े की पीठ पर पहली Gumming और चिपकाने द्वारा निर्मित कर रहे हैं। तुम भी बिंदी छपाई मशीन स्थापित डिजाइनर बिंदी के विभिन्न विभिन्न प्रकार का उत्पादन कर सकते हैं। Bindi या तो ग्राहक की आवश्यकता के अनुसार एक बॉक्स या दीवार हैंगर में पैक कर रहे हैं

बिंदी बनाने की मशीन

बिंदी बनाने के लिए आप बिंदी मुद्रण, बिंदी काटने की मशीन और विभिन्न die स्थापित करने के लिए की आवश्यकता होगी। यह एक बहुत ही छोटी परियोजना है। तुम कुछ हाथ उपकरण भी होने से इस व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। लाभप्रदता बढ़ाने के लिए, यह सामान्य बिंदी उत्पादन लाइन के साथ डिजाइनर बिंदी का उत्पादन करने की सलाह दी जाती है। बिंदी बनाने में गुणवत्ता नियंत्रण मानक है, कपड़े त्वचा के अनुकूल होना चाहिए।

श्रमिक(दैनिक मजदूरी):

यदि कोई उद्यमी ग्रामीण इलाके से Bindi Making Business को start करना चाह रहा हो तो वह Manpower daily basis पर भी रख सकता है, क्योंकि शहरों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में दैनिक मजदूरी पर काम करने वाले श्रमिक आसानी से मिल जाते हैं | यद्यपि उद्यमी Housewife को अपने कर्मचारी के रूप में दैनिक मजदूरी के रूप में काम दिला सकता है और जब उद्यमी को लगने लगे की उसका बिज़नेस पूर्ण रूप से चल निकलेगा, तो वह उनको स्थायी तौर पर भी काम पर रख सकता है | महिलाओं को काम पर रखने का उद्यमी को एक और फायदा यह होगा की बिंदियों के बारे में उसे प्रत्यक्ष फीडबैक मिलता रहेगा जिससे वह आवश्यकता पड़ने पर अपने बिंदी के डिजाईन में बदलाव ला सकता है |  यद्यपि Bindi making business को 3-4 लाख रूपये की Investment के साथ आसानी से शुरू किया जा सकता है लेकिन फिर भी उद्यमी को चाहिए की वह अपने स्थानीय क्षेत्र की Market में ही इस Business की संभावनाओं का मूल्यांकन करे, क्योकि कमाई की दृष्टि से स्थानीय बाज़ार में शाख बनाकर ही बाहर की ओर कदम बढ़ाना समझदारी एवं सुरक्षित फैसला है |

फ्रीलांसर FREELANCER BUSINESS

यां व्यापार Temporary भी हो सकता है और Permanent भी। यह आज के दिन बहुत सारे लोग Internet पर कर रहे हैं। एक Freelancer वो Self Employed लोग होते हैं जो कुछ पैसे ले कर अपने Skills को इस्तेमाल करके किसी दुसरे का कार्य पूरा करता है।

घर में ब्यूटी पार्लर BEAUTY PARLOUR AT HOME

ब्यूटी पार्लर नै पीढ़ी का एक बहुत तेज़ी से दुनिया भर में Grow करता हुआ व्यापार है। सलून और ब्यूटी पार्लर आज के दिन का ज़बरदस्त बिज़नस है जिसमें ढेर सारा Opportunity है, खासकर महिला Entrepreneurs के लिए जो इस चीज़ में Expert हैं।

इलेक्ट्रॉनिक चीजों का रिपेयरिंग REPAIRING ELECTRONIC EQUIPMENT

आज कल इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद हर जगह है चाहे घर हो या ऑफिस। चाहे TV हो या Cooler हर दिन इलेक्ट्रॉनिक चोजों का इस्तेमाल बढ़ते चला जा रहा और जितनी तेज़ी से इसका इस्तेमाल हो रहा है उतनी ही तेज़ी से इलेक्ट्रॉनिक मशीन ख़राब भी हो रहे हैं। ऐसे में Electronic Equipment Repairing के व्यापार की बहुत ज़रुरत है।

तो आप जब भी इलेक्ट्रॉनिक चीजों का रिपेयरिंग शॉप खोलेंगे वो चलेगा बहुत। इस व्यापार में लागत बहुत ही कम है पर इसके लिए अच्छा Experience होना बहुत आवश्यक है Training Certificate के साथ।

 छोटा किराने की दुकान SMALL GROCERY SHOP

किराने की दुकान शुरू करना बहुत ही आसान व्यापार है। इसमें बस आपको किराने का Wholesale से किराने का सामान खरीद कर लाना होता है और लोगों को Retail दामों में बेचना होता है। इस व्यापार में सबसे बड़ा कार्य एक चीज है अपने समानों के खरीदी और बिक्री का सही Record लिख कर रखना।

आइस क्रीम पारलर ICE CREAM PARLOR

यह बिज़नस नए लोगों के लिए बहुत ही अच्छा है। इसमें बहुत ही छोटा Investment हैं और इस नए दौर में लगभग 70% लोग आइस क्रीम के दीवाने हैं। बस जरूरत है एक अच्छे जगह की जहाँ आप आइस क्रीम पारलर की शुरुवात कर सकें।

कुछ औउर छोटी चीजें जैसे Ice-Cream बनाने का सामान, मशीन और फ्रिज ताकि आइसक्रीम को Store करके रख सकें।

 ब्लॉग्गिंग BLOGGING

ब्लॉग्गिंग इन्टरनेट पर अपने ज्ञान को साझा करने के साथ-साथ पैसे कमाने का एक अच्छा उपाय है। आज इन्टरनेट पर बहुत जारे ब्लॉगर Blogger जुड़ चुके हैं जो ब्लॉग्गिंग को अपना व्यवसाय और जिंदगी बना चुके हैं। आपने ब्लॉग पर खुद के Knowledge को शेयर कर सकते हैं और लोगों को अच्छे Tipsअ भी दे सकते हैं।

आपको बस अपना ब्लॉग Online बनाना है और अपना Post लिख कर Publish करना होता है। इसके लिए आपको किसी भी प्रकार के क्वालिफिकेशन की आवश्यकता नहीं होती है। हर कोई व्यक्ति Blogging करे सकता है।

मत्स्य व्यवसाय FISHERY BUSINESS

मत्स्य कृषि या फार्मिंग में आप बहुत अच पैसा कम सकते हैं बस आपको सही जगह और ट्रेनिंग की आवश्यकता है। इस व्यापार की खास बात यह है कि आप मछली कृषि अपने स्वयं की तालाब या भाड़े में लिए हुए तालाब में भी कर सकते हैं। मछली स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक है और एक अच्छा फैट सोर्स है।

आपको इस व्यापार के लिए छोटा मछली चारा यानिकी छोटी मछलियां खरीद कर लाना होता है और उन्हें तालाब में बड़ा करना पड़ता है। इसके लिए उनके स्वास्थ्य की जानकारी, सही मछली दाना का उपयोग करना बहुत आवश्यक है।

 ज़ेरॉक्स और लेमीनेशन XEROX AND LAMINATION BUSINESS
ज़ेरोक्स, लेमीनेशन और किताबें बंधन का काम सभी शहरों का पारंपरिक व्यापार है जो कई वर्षों से चलता आ आरहा है। यह व्यापार कोई एक अकेला व्यक्ति आसानी से शुरू कर सकता है और इसमें लगत भी बहुत कम है। इस व्यापार में आपको खासकर 2-3 इलेक्ट्रॉनिक मशीनों की आवश्यकता पड़ती है जैसे ज़ेरॉक्स मशीन, लेमीनेशन मशीन, और कंप्यूटर।

इन सामानों को खरीदने के बाद आपको दुकान के लिए एक किराये के जगह की आवश्यकता होगी और कुछ कोटे मोटे खर्चे जैसे इंक, टोनर, कागज़, और बिजली का बिल देना होगा। यह व्यापार एक 6 X 6 फीट के कमरे में भी शुरू किया जा सकता है।

कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर COMPUTER TRAINING CENTRE

एक कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर Computer Training Centre वो जगह होता है जहाँ लोग Computer को operate करने की Knowledge लेने के लिए आते हैं। अगर आपने Computer से जुडी उच्च शिक्षा प्राप्त की है और आपको एक Tuition Centre शुरू करने की अनुमति है तो आप जरूरत के अनुसार License ले कर कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर शुरू कर सकते हैं।

आप अपने Computer Centre में Basic और Advance दोंमो प्रकार के Course पढ़ा सकते हैं अपने लाइसेंस के अनुसार। कंप्यूटर का युग बढ़ते चला जा रहा है ऐसे में यह एक बहुत ही Profitable Business Idea है। आप एक छोटा सा कंप्यूटर सेंटर अपने घर में भी शुरू कर सकते हैं 2-3 कंप्यूटर रख कर।


GST for laugh Udyog and for small business in Hindi, GST छोटे उद्योगों 


ब्यूटी पार्लर आप बहुत कम पैसों में शुरू कर सकते हैं। आपको शुरुवात के लिए कुछ अच्छे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स की ज़रुरत है, ब्यूटी टूल्स की भी और एक अच्छा सा जगह Parlour के लिए, वो आपका घर भी हो सकता है या कोई Rented जगह भी।



उदहारण के लिए जैसे किसी को अपने कंपनी का लोगों बनवाना हो, वेबसाइट से जुडी कुछ चीजों को सुधारना हो, किसी के लिए आर्टिकल लिख कर या कोई भी ऐसा काम जो दुसरे व्यक्ति को ना आता हो। Freelancer के व्यापार के लिए आपको किसी भी प्रकार का Investment नहीं करना पड़ता है।

छोटे उद्योगों को बैंकों से कर्ज नहीं मिलने की शिकायत के बारे में पूछे जाने पर गुप्ता ने कहा, 'औपचारिक तौर पर काम करने वाले छोटे उद्योगों को बैंकों से कर्ज मिलने में कोई दिक्कत नहीं है। बैंक कर्ज देने के लिए तैयार हैं, समस्या केवल आपके खाते और कारोबार को लेकर हो सकती है। यदि सभी काम औपचारिक प्रणाली के तहत होंगे तो बैंक कर्ज देने के लिए तत्पर बैठे हैं। उद्योग संगठन के महासिचव ज्यातिर्मय जैन ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जीएसटी आने से संगठित क्षेत्र का दायरा बढ़ेगा। इससे सभी के लिए समान स्तरीय कारोबार के अवसर पैदा होंगे। जीएसटी में हर चीज औपचारिक चैनल में होगी, इसमें रिकॉर्ड से बाहर कुछ भी नहीं होगा। आपको अपना पूरा कारोबार औपचारिक व्यवस्था के तहत लाना होगा।' 

उल्लेखनीय है कि देश में 1 जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद विपक्षी दलों का आरोप है कि इससे देश का छोटा उद्यमी और कारोबारी बुरी तरह प्रभावित हुआ है और उसका काम ठप है। मुकेश मोहन गुप्ता कहते हैं, 'आज जो भी बड़े उद्योग हैं वह सभी कभी छोटे उद्योग ही थे। उन्होंने संगठित उद्योगों के श्रेणी में रहते हुए अपना पूरा कारोबार औपचारिक व्यवस्था के तहत किया और उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिला। जीएसटी व्यवसथा में तो यदि आप पंजीकरण नहीं कराएंगे तो बड़े उद्योग आपसे माल भी खरीदने में हिचिकचाएंगे।' 

विनिर्माण क्षेत्र में प्लांट एवं मशीनरी में 25 लाख रुपये तक का निवेश करने वाले उद्योग सूक्ष्म उद्योगों की श्रेणी में आते हैं जबकि प्लांट एवं मशीनरी में पांच करोड़ रुपये तक का निवेश करने वाली इकाई लघु उद्योगों की श्रेणी में आते हैं। इसी प्रकार संयंत्र एवं मशीनरी में 10 करोड रुपये तक निवेश करने वाले उद्योग मध्यम श्रेणी के उद्योगों में शामिल होते हैं। 

सेवा क्षेत्र में काम करने वाले उद्योगों में विभन्न प्रकार की मशीनों एवं उपकरणों पर 10 लाख रुपये तक निवेश होने पर सूक्ष्म श्रेणी, दो करोड़ रुपये तक लघु और पांच करोड़ रुपये तक का निवेश मशीन एवं उपकरणों में होने पर मध्यम श्रेणी की इकाई मानी जाती है। देश के सकल घरेलू उत्पाद में लघु एवं मझोले उद्योगों का 37 प्रतिशत तक योगदान है जबकि निर्यात में भी लघु उद्योगों का अच्छा योगदान रहता है। 



 Digital Marketing |डिजिटल विपणन क्या है

Marketing Business काफी टाइम से बहुत ही फायदेमंद रहा हे। क्यू की सब कंपनी को अपना Product या Service Sell करने के लिए उसकी Marketing करनी जरुरी होती हे। और जब से सब लोग अपने Product के बारे में Digital Marketing करवाना Start किया हे तब से Company को और Digital Marketeers को दोनों को फायदा हुआ हे। 

किसी भी Company के किसी भी Product या फिर Service के बारे में Social Media या फिर Online सबको बताना यानि की उसकी Marketing करना उसे Digital Marketing कहा जाता है। इसकी मदद से Company अपने Products की Advertise करती हे जिससे उन्हें Customer मिल सके। 

Digital Marketing Business सुरु करने के लिए आपको ऐसी Company से contact करना चाहिए जो अपने Product की Advertise Online करवाना चाहती हो। इस बिज़नेस को करने के लिए आपके पास अपने Social Media पे अच्छे Followers होना जरुरी हे। जिससे आप किसी भी Product की अच्छे से Marketing कर सको। 

अगर आपके पास अपने Social Media यानि की Facebook और Instagram में अच्छे Followers होते हे तो काफी बार तो Company ही आपको सामने से contact करती हे। और अपने Product की Advertise करने को केहती हे। आप इस Online Business Ideas को करके अच्छे पैसे कमा सकते हो। 

Small business promotion ideas in hindi

अगर आपका venture ऐसा है जिसमे आप ऐसी services देते है जो एक बहुत बड़े area को cover नहीं करती है  तो केवल internet पर निर्भर रहना एक बेवकूफी हो सकती है ऐसे में आपको चाहिए कि कुछ पुराने और कुछ नए तरीको को आपस में mix करके इस तरह से आप अपने brand को promote करें कि local reach अधिक से अधिक हो और कोशिश करें आप अपने brand के जरिये लोगो से सीधे जुड़े |

टीवी और रेडियो पर करें विज्ञापन –

 ऐसा नहीं है कि यह जरुरी है कि आप किसी बड़े channel पर अपने brand के बारे में add दें क्योंकि वो बहुत ही अधिक costly पडती है जबकि अगर स्थानीय लोगो के बीच अपनी पहचान कायम करना चाहते है तो आपके शहर के FM या local radio channel आपका काम आसान कर सकते है और किसी भी शहर में जो cable provider होते है उनमे से अधिकतर अपनी तरफ से ग्राहकों को जानकरी मुहैया करवाने के लिए local Chanel शुरू करते है और आप भी उसी टीवी channel पर अपनी add दे सकते है और इस तरीके के साथ खास बात होती है यह अधिक महंगा भी साबित नहीं होता है और साथ ही आपको पता भी होता है कि आपका प्रचार किस तरह की audience तक पहुँच रहा है | Small business के लिए यह तरीका promotion का काफी बेहतर होता है |


Small business promotion ideas in hindi

Small business

अगर आप किसी तरह की services देते है जो आपके शहर के बाहर भी आप दे सकते है तो एकदम से online ads की जगह आप कुछ ऐसे blogs की तलाश कर सकते है जो आपके काम से जुड़े हो फिर चाहे उनका traffic कम ही क्यों न हो क्योंकि हमेशा की तरह एक तो वो आपके लिए महंगे नहीं होंगे और दूसरा आपको पता होता है किसी खास तरह के blog पर content के अनुसार किस तरह के लोग visit करते है | 

1.फ्री सैंपल देकर / Give them free sample- 

असल में प्रभावी तौर पर किसी का ध्यान आकर्षित करने के लिए यह सबसे बेहतर तरीका है और ऐसे में आप लोगो को अपने product का सैंपल या फिर अगर कोई service देते है तो उसके लिए डेमो फ्री ऑफर कर उनका ध्यान आकर्षित कर सकते है |  ऐसे में अगर आपका काम या product किसी को पसंद आता है तो बहुत संभव है कि वो आपके permanent वाले कस्टमर्स बन सकते है |Small business के लिए यह तरीका कमाल का होता है |

2.सोशल काम करके / Do some social work – 

 वैसे यह तरीका भी सही काम करता है अगर business के साथ साथ आप किसी तरह की सोशल गतिविधि में हिस्सा लेते है और कोई social activity को organise करते है जैसे कि blood donation कैंप तो ऐसे में लोगो के मन में आपके लिए एक सकारात्मक छवि बनती है और लोग आपसे जुड़ने लगते है | Small business के लिए सोशल वर्क एक तरह से लोगो में उनके लिए भरोसा कायम करता है |

3.अख़बार भी नहीं है कम / newspaper are too important – 

लोग सोचते है कि internet के आ जाने के बाद अख़बारों की लोकप्रियता में कमी आई है जबकि ऐसा नहीं है क्योंकि अखबार के अपने फायदे है और newspaper के अपने फायदे है आज भी अधिकतर लोग epaper के मुकाबले अख़बार को पुराने वाले तरीके से ही पढना पसंद करते है और फिर चाहे लोग देश और दुनिया की ख़बरों के लिए टीवी channel या फिर किसी news app पर निर्भर हो लेकिन अपने आस पास क्या हो रहा है और ऐसी खबरे जो बड़े अख़बारों की हैडलाइन नहीं बनती है को जानने के लिए local अख़बारों की मदद लेते है और यही अवसर है आपके पास अख़बारों के लिए अपना promotion करने के लिए क्योंकि यह एक अच्छी वजह है और साथ ही यह बहुत ही कम खर्चीला भी होता है | Small business के लिए अख़बार promotion इसलिए भी सही होता है क्योंकि इस से local reach बढ़ जाती है |

4.contests के जरिये / promote by contest  – 

 असल में कोई भी बड़ी या छोटी कम्पनी यह करती हुई आपको किसी मॉल या किसी अच्छी जगह जन्हा पर लोगो की gathering अच्छी वाली होती है वंहा पर किसी तरह का कोई कांटेस्ट करवाते है ताकि लोग उनमे भाग भी लें और साथ fun के साथ साथ brand से भी जुड़ जाएँ |


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TOP  POSITIVE ARTICLE OF 2018


                               1.  2018   How-to-develop-self-confidence


                                               2.    2018 positive thinking



                                                3.   2018 inspirational stories


                                                    4.   2018 success stories


                                5.   2018 online short stories



                                                 6. 2018 best way to reduce stress

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