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Friday, 20 July 2018

सकारात्मक सोच भाग 1 :- बुराई को काटना

 सकारात्मक सोच  भाग 1 :- बुराई को  काटना 

" यह सकारात्मक सोच सकारात्मक सोच भाग 1 :- बुराई को काटना ,आलेख गलत आदत को छोड़ने और स्वयं को नई आदत विकसित करने के बारे में है और यह लेख आपको अपनी बुरी आदत के बारे में सोचने में मदद करता है और आप अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। इस लेख में आपको कई लेखक नाम मिलते हैं जो इस बारे में बात कर रहे हैं कि कैसे बुरी आदत को प्रतिस्थापित करें बुराई को काटना ,सकारात्मक सोच भाग 1,यह आलेख सकारात्मक सोच के बारे में है मेरे बारे में हमारे जीवन में सोच का बहुत महत्व होता है। जब हमारी सोच सही होती है या जब हम सकारात्मक सोचते हैं तो हमारे सभी काम भी सही तरीके से पूरे हो जाता है। जे व्यक्ति की सोच, सकारात्मक (पॉज़िटिव) सोच। जीवन, यह एक हमेशा चलते रहना चाहते हैं, सकारात्मक सोच आपको और अधिक खुशी, शांति, प्यार, सफलता और कई अन्य लोगों को अपना आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान, साहस, आप डर से मुक्त महसूस करते हैं जो आप वर्तमान में सामना करते हैं। या आप अपने जीवन में कुछ भी करना चाहते हैं लेकिन आप किसी स्थान पर फंस गए हैं तो सकारात्मक ऊर्जा आपको इससे बाहर निकलने में मदद करती है हिंदी में सकारात्मक सोच से कई अलग-अलग लाभ इसलिए सकारात्मक रहें और अपने जीवन में आगे बढ़ें इस प्रकार के लेख आपको आपकी मदद करते हैं जीवन जहां ढेर सारी खुशियों के बीच में दुःख भी आते हैं। बहुत सारी खुशियों के बाद, दुःख भी उत्पना ही आता है और वह चक्कर फिर से चालू होता हैसकारात्मक सोच भाग 1 :- बुराई को काटना "
यह छवि के  बुराई को  काटना   



बुराई को  काटना 

जीवन में अक्सर ऐसे अवसर आते हैं, जब जरा सी लापरवाही भारी पड़ जाती है। हम मन ही मन सीझते रहते हैं , भुनभुनाते रहते हैं । सोचते हैं वह काम दूसरी तरह से करते , तो अच्छा होता । विश्वप्रसिद्ध लाइफ कोच डेल कार्नेगी ने सफलता प्राप्त करने से पहले ऐसी कई ठोकरें खाई । फिर उनकी मुलाकात सांडर्स से हुई , जिन्होंने अपने एक अध्यापक की बात से व्यवहारिक जीवन का पाठ समझाया । एक दिन वह एक गिलास में दूध की एक बोतल लेकर आए और नीच के किनारे रख दी । फिर वह उठे और हम सबके सामने बोतल सिंक में फेंक दिया और चिल्ला कर -बोले गिरे हुए दूध पर रो मत , दूध और बोतल नष्ट हो चुके हैं । दुनिया की कोई ताकत उसे वापस नहीं ला सकती थोड़ा ध्यान दिया जाता तो यह बस जा सकता था , पर देर हो गई । अब इसे बुलाकर अगला काम करना चाहिए।

नकारात्मक आदत कैसे छोड़ें

इसी प्रसंग में फील्ड फिया bulletin के
sampadak का कथन उल्लेखनीय हैं । एक बार कॉलेज के स्नातकों को संबोधित करते हुए उन्होंने पूछा - तुम में से कितने लोग हैं , जिन्होंने आरी से लकड़ी काटी है ? बहुत से छात्रों ने हाथ खड़े किए ।

फिर उन्होंने पूछा -

कितनों ने बुरादे को काटा ?
इस बार कोई हाथ नहीं उठा । फिर उन्होंने बहुत पते की बात कही - जाहिर है , तुम बुरादे को काट नहीं सकते । वह तो पहले से ही कटा हुआ है । अतीत पर भी यही लागू होता है यानी जो बीत चुका है, उसके बारे में चिंता करना बुरादे को दुबारा काटने जैसा है । तो आंसू क्यों भाई जाएं? हमसे गलतियां हो जाती हैं । मूर्खता के काम कर लेते हैं, तो क्या हुआ? कौन नहीं करता ? इसलिए पिछला सब भूल कर नहीं लकड़ी काटो ।
सकारात्मक सोच से लाभ



मुझे आशा है कि आपको यह लेख  बुराई को  काटना  ,सकारात्मक सोच  भाग 1 पसंद आएगा और आप इस आलेख से थोड़ी सी यात्रा के लिए सीखेंगे,मुझे उम्मीद है कि आपको यह सकारात्मक लेख पसंद है सकारात्मक सोच भाग 10:-प्रार्थना का सच ताकि आप प्रेरित हो जाएं और अपने जीवन में मुस्कुराते रहें
आने के लिए धन्यवाद !!।सकारात्मक सोच भाग 9 :- अंदर की आवाज को अनसुना ना करें


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