Latest

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Post Top Ad

Wednesday, 8 August 2018

सकारात्मक सोच भाग 10:-प्रार्थना का सच

सकारात्मक सोच  भाग 10:- प्रार्थना का सच


"यह आलेख सकारात्मक सोच  भाग 10:-प्रार्थना का सच , सकारात्मक सोच के बारे में है मेरे बारे में हमारे जीवन में सोच का बहुत महत्व होता है। जब हमारी सोच सही होती है या जब हम सकारात्मक सोचते हैं तो हमारे सभी काम भी सही तरीके से पूरे हो जाता है। जे व्यक्ति की सोच, सकारात्मक (पॉज़िटिव) सोच। जीवन, यह एक हमेशा चलते रहना चाहते हैं, सकारात्मक सोच आपको और अधिक खुशी, शांति, प्यार, सफलता और कई अन्य लोगों को अपना आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान, साहस, आप डर से मुक्त महसूस करते हैं जो आप वर्तमान में सामना करते हैं। या आप अपने जीवन में कुछ भी करना चाहते हैं लेकिन आप किसी स्थान पर फंस गए हैं तो सकारात्मक ऊर्जा आपको इससे बाहर निकलने में मदद करती है हिंदी में सकारात्मक सो आपकी मदद करते हैं जीवन जहां ढेर सारी खुशियों के बीच में दुःख भी आते हैं। बहुत सारी खुशियों के बाद, दुःख भी उत्पना ही आता है और वह चक्कर फिर से चालू होता है।"च से कई अलग-अलग लाभ इसलिए सकारात्मक रहें और अपने जीवन में आगे बढ़ें इस प्रकार के लेख सकारात्मक सोच  भाग 10:-प्रार्थना का सच"


सकारात्मक सोच  भाग 10:-प्रार्थना का सच
सकारात्मक सोच  भाग 10:-प्रार्थना का सच



प्रार्थना का सच


सदियों से मनुष्य जाति ने जीवन जीने के दो तरीके अपनाए उनमें प्रार्थना को भी शामिल किया प्रार्थना इसलिए नहीं कि ईश्वर एक सर्वशक्तिमान सकता है इसकी विराटता भाई का कारण नहीं प्रेम और श्रद्धा का विषय है जो हम से श्रेष्ठ है वह हमें हमारी श्रद्धा का और जो सम्मान है वह हमारी प्रियता का अधिकारी है हमारी प्रार्थनाएं एक भावाकुल संवाद की तरह प्रकट हुई है हमारे यहां प्राचीन वैदिक विचार हैं जो ईश्वर के लिए गाई गई है प्रार्थनाएं मंत्र के रूप में भी रची गई है संस्कृत श्लोकों में आदि शंकराचार्य और साधकों संतो व कवियों के अनेक सतवन अत्यंत मनोहारी हैं गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि मैं बैंकॉक या योगियों के हृदय में निवास नहीं करता मैं तो वहां होता हूं जहां भक्त मेरा गान करते हैं ।

संसार के सभी धर्मों सभी भाषाओं में प्रार्थना को महत्व मिला है हम इश्वर से कुछ ना कुछ चाहते हैं हम दुख से मुक्ति चाहते हैं सुख धन स्वास्थ्य और बाधाओं के प्रशमन की कामना करते हैं हमारी प्रार्थनाओं के मूल्य में भौतिक इच्छाएं प्रबल हो जाती हैं लेकिन सभी साधकों ने प्रार्थना के केंद्र में आता था और शरणागति को महत्व दिया है शरीर का रोमांच आंख के असूल गदगद वाणी और विषय कल्याण की भावना ही प्रार्थना के बीज भाव है

 प्रार्थना सात्विक भाव के उदय से फलीभूत होती है हमारे यहां मंत्र जप में अजपा जप को बड़ा महत्व मिला है जब मोहन भाव से हो या और थोड़े ही ले या उच्चरित हो अपने और सब के कल्याण के लिए अपशब्द या मौन प्रार्थना रोम-रोम से की गई प्रार्थना सबसे मूल्यवान है|


मुझे उम्मीद है कि आपको यह सकारात्मक लेख पसंद प्रार्थना का सच ,  है अंदर की आवाज़ें अनसुना ना करें ताकि आप प्रेरित हो जाएं और अपने जीवन में मुस्कुराते रहें

आने के लिए धन्यवाद !!।


सकारात्मक सोच,सुविचार ,सुविचार हिंदी मे,सकारात्मक विचार ,सुविचार हिंदी में ,सुविचार इन हिंदी ,अच्छी सोच ,हिंदी सुविचार सुविचार फोटो सहित
हिन्दी सुविचार फोटो ,सुविचार हिंदी ,anmol suvichar
हिंदी सुविचार संग्रह ,सकारात्मक ,positive thinking in hindi

No comments:

Post a Comment

'; (function() { var dsq = document.createElement('script'); dsq.type = 'text/javascript'; dsq.async = true; dsq.src = '//' + disqus_shortname + '.disqus.com/embed.js'; (document.getElementsByTagName('head')[0] || document.getElementsByTagName('body')[0]).appendChild(dsq); })();

Post Top Ad