सकारात्मक सोच भाग 11:-तीन टांग की दौड़ में दो आदमी - EM

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Wednesday, 8 August 2018

सकारात्मक सोच भाग 11:-तीन टांग की दौड़ में दो आदमी

सकारात्मक सोच  भाग 11:-तीन टांग की दौड़ में दो आदमी

"यह आलेख  सकारात्मक सोच  भाग 11 :-तीन टांग की दौड़ में दो आदमी सकारात्मक सोच के बारे में है मेरे बारे में हमारे जीवन में सोच का बहुत महत्व होता है। जब हमारी सोच सही होती है या जब हम सकारात्मक सोचते हैं तो हमारे सभी काम भी सही तरीके से पूरे हो जाता है। जे व्यक्ति की सोच, सकारात्मक (पॉज़िटिव) सोच। जीवन, यह एक हमेशा चलते रहना चाहते हैं, सकारात्मक सोच आपको और अधिक खुशी, शांति, प्यार, सफलता और कई अन्य लोगों को अपना आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान, साहस, आप डर से मुक्त महसूस करते हैं जो आप वर्तमान में सामना करते हैं। या आप अपने जीवन में कुछ भी करना चाहते हैं लेकिन आप किसी स्थान पर फंस गए हैं तो सकारात्मक ऊर्जा आपको इससे बाहर निकलने में मदद करती है हिंदी में सकारात्मक सोच से कई अलग-अलग लाभ इसलिए सकारात्मक रहें और अपने जीवन में आगे बढ़ें इस प्रकार के लेख आपको आपकी मदद करते हैं जीवन जहां ढेर सारी खुशियों के बीच में दुःख भी आते हैं। बहुत सारी खुशियों के बाद, दुःख भी उत्पना ही आता है और वह चक्कर फिर से चालू होता है  सकारात्मक सोच  भाग 11:-तीन टांग की दौड़ में दो आदमी"

सकारात्मक सोच  भाग 11:-तीन टांग की दौड़ में दो आदमी
सकारात्मक सोच  भाग 11:-तीन टांग की दौड़ में दो आदमी









तीन टांग की दौड़ में दो आदमी

आप और आदमी में एक बड़ी समानता यही है कि दोनों जितना तपंगे उतना ही पकंगे ।

हे मेरे प्रिय आम आदमी या तो तू आम बना रहा यह सिर्फ आदमी। गठजोड़ मत कर आदमी आदमी होता है आम नहीं होता इसी तर्ज पर कोई आम आदमी की तरह नहीं होता कभी-कभी मजबूर सही होता है पता गलत कभी इसके उल्टा चौपाया बना रहा गरुड़ मत बंद जटायु मरण से पहले सीता हरण तो  होने दे । टोपी उतार सिर खुजा खून के झूठ मत भी बचा कर रख कुछ और पीले नदी में कूदने के लिए कपड़े उतारना जरूरी नहीं होता

हे आम हे आदमी अभी भी पिलपिला मत हो चुनाव करीब है गुठली में गुदा बनने दे कोयल की बोली की मिठास बटोरता रह । नेताओं के काम आएगी। आम और आदमी में समानता यही है कि जितना तपंगे उतना पकंगे । बगैर शोषित दलित बन जाना तो आदमी की फितरत है गंजे सिर पर चोटी रखने से आदमी चाणक्य नहीं हो जाता यदि आप शरीर है तो गुठली उसकी आत्मा यह गीता में सार नहीं है मेरा सारा है

है आदमी तू बच्चा है गलत संगत में पड़ बड़ा होकर तुझे राजनीति में जाना ही है मतदान का फल देने वाले को नहीं लेने वाले को मिलता है असली उपवास तो भूखे लोग ही रखते हैं अरे भैया कौन नहीं जानता कि संपन्नता सी जाति बदल जाती है एकता में विभिन्नता अक्सर भिनभिनाती लगती है सूखे पेड़ को छोड़कर हरी-भरी डाल को काटने वाले आदमी जरूर नहीं है कि भूतपूर्व कालिदास हो इसके लिए हमारा वन विभाग भी तो है ।

है आदमी तुझे चुनावों से डरना नहीं चाहिए लोकतंत्र की राजनीति में चुनाव से पहले का ललित युद्ध समझो चुनाव का पूर्वाभ्यास होता है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग केवल आदमी ही नहीं पाकिस्तान में भी करता है वहां की संसद के आगे कोई भी आतंकवादी हमें गाली दे सकता है आप चिंता ना करें हाथ में दस्ताने पहनकर अभी भी वोट डालने का अभ्यास शुरू कर दे प्रैक्टिस मैक्स ए मैन परफेक्ट|

मुझे उम्मीद है कि आपको यह सकारात्मक लेख  तीन टांग की दौड़ में दो आदमी पसंद है अंदर की आवाज़ें अनसुना ना करें ताकि आप प्रेरित हो जाएं और अपने जीवन में मुस्कुराते रहें

आने के लिए धन्यवाद !!।


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