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Tuesday, 7 August 2018

सकारात्मक सोच भाग 7:-जीवन का संगीत

सकारात्मक सोच भाग 7:-जीवन का संगीत:-


"यह लेख सकारात्मक सोच भाग 7:-जीवन का संगीत अभावों के बारे में सब कुछ है। जीवन सकारात्मक तरीके से बाहर निकलता है। और जहां संसाधन आपकी सफलता में कोई फर्क नहीं पड़ता, केवल आपकी इच्छा से कोई फर्क पड़ता है जो आपको अपने जीवन में और अधिक सफलता देता है, जिंदगी उसी की है| यह आलेख सकारात्मक सोच के बारे में है मेरे बारे में हमारे जीवन में सोच का बहुत महत्व होता है। जब हमारी सोच सही होती है या जब हम सकारात्मक सोचते हैं तो हमारे सभी काम भी सही तरीके से पूरे हो जाता है। जे व्यक्ति की सोच, सकारात्मक (पॉज़िटिव) सोच। जीवन, यह एक हमेशा चलते रहना चाहते हैं, सकारात्मक सोच आपको और अधिक खुशी, शांति, प्यार, सफलता और कई अन्य लोगों को अपना आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान, साहस, आप डर से मुक्त महसूस करते हैं जो आप वर्तमान में सामना करते हैं। या आप अपने जीवन में कुछ भी करना चाहते हैं लेकिन आप किसी स्थान पर फंस गए हैं तो सकारात्मक ऊर्जा आपको इससे बाहर निकलने में मदद करती है हिंदी में सकारात्मक सोच से कई अलग-अलग लाभ इसलिए सकारात्मक रहें और अपने जीवन में आगे बढ़ें इस प्रकार के लेख आपको आपकी मदद करते हैं जीवन जहां ढेर सारी खुशियों के बीच में दुःख भी आते हैं। बहुत सारी खुशियों के बाद, दुःख भी उत्पना ही आता है और वह चक्कर फिर से चालू होता है,सकारात्मक सोच भाग 7:-जीवन का संगीत "


सकारात्मक सोच भाग 7:-जीवन का संगीत
सकारात्मक सोच भाग 7:-जीवन का संगीत




जीवन का संगीत


कहते हैं कि अल्बर्ट आइंस्टाइन को यह अंदेशा था कि तकनीक का विकास मनुष्य को अमानवीय बना सकता है लोग इसके इतने गुलाम हो जायेंगे कि मानवीय मूल्यों को भूल जाएंगे मोबाइल व कंप्यूटर ने जिस तरह लोगों पर कब्जा कर लिया है उसे देखते हुए यह अंदेशा सच साबित हुआ है तकनीक के उपयोग की बौद्धिक कुशलता हमने पाली है पर मनुष्य में जिस तरह आईक्यू होता है उसी तरह इफ यू यानी इमोशनल quotient भी होता है यानी भावनाओं को मापने का तरीका

तकनीक के उपयोग के लिए बुद्धि का उच्च स्तर जरूरी है पर जीवन की परीक्षा पास करने के लिए भावनाओं को नियोजित करने का गुण जरूरी है अक्सर देखा जाता है कि कॉलेज में अच्छे नंबरों से उत्तीर्ण होने वाले जीवन की परीक्षा में सफल नहीं दिखते क्योंकि बुद्धि और भाव को विकसित करने के तरीके बिल्कुल अलग अलग हैं


इस विषय पर अमेरिकी मनोवैज्ञानिक डेनियल गोलमैन अनुसंधान किया है उनका कहना है कि जीवन में 20 फ़ीसदी सफलता आईक्यू से मिलती है जबकि 80 ई- क्यू के कारण संबंध निभाने और जीवन में आने वाली हार जीत से तालमेल में ई- क्यू ही काम आती है भावनाओं को समझ कर उनमें निहित ऊर्जा का रचनात्मक उपयोग करना एक खास तरह का परीक्षण होता है जो शिक्षा संस्थानों में नहीं दिखाया जाता जिनका क्यों कम होता है उनका जीवन परेशानियां गिनने में ही कट जाता है मनुष्य एक समन्यव है विभिन्न केंद्रों का जिसमें शरीर बुद्धि भाव और आत्मा सब हैं यह सारे केंद्र जब एक दूसरे से तालमेल रखते हैं एक सुरीला संबंध विकसित करते हैं कभी जीवन की लय बनती है|



मुझे उम्मीद है कि आपको यह सकारात्मक लेख पसंद है,सकारात्मक सोच भाग 7:-जीवन का संगीत , अंदर की आवाज़ें अनसुना ना करें ताकि आप प्रेरित हो जाएं और अपने जीवन में मुस्कुराते रहें

आने के लिए धन्यवाद !!।












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