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सरस्वती पूजा ,पौराणिक महत्व ,वसंत पंचमी का महत्व ,वसंत पंचमी Saraswati puja 2020 in Hindi

Saraswati puja 2020 in Hindi



Article Topic
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एक लोकप्रिय हिंदू त्योहार, वसंत पंचमी, जिसे बसंत पंचमी भी कहा जाता है, which माघ ’के महीने के पांचवें दिन मनाया जाता है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर के जनवरी या फरवरी से मेल खाता है।

यह त्योहार वसंत के मौसम की शुरुआत और देवी सरस्वती के जन्म के दिन को मनाता है, जो ज्ञान और शिक्षा की देवी हैं। यह होली के रंगीन त्योहार के आगमन की भी घोषणा करता है।

वसंत पंचमी को उत्तर और दक्षिण भारत के हिंदुओं द्वारा अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। जबकि यह पंजाब में एक पतंग उत्सव है, यह बिहार में एक फसल उत्सव है। जबकि यह उत्तर में शैक्षणिक संस्थानों में सरस्वती पूजा के रूप में मनाया जाता है, यह ज्यादातर दक्षिण भारत में एक मंदिर त्योहार है। लेकिन सार्वभौमिक रूप से, पीला दिन के रंग को नियंत्रित करता है, क्योंकि यह वसंत के आगमन की शुरुआत करता है और जीवन और प्रकृति की सकारात्मक ऊर्जा को दर्शाता है। यह सरसों के फूलों का रंग भी है जो इस मौसम में खिलते हैं। न केवल हिंदू बल्कि जैन, सिख और बौद्ध भी देवी सरस्वती की पूजा करते हैं क्योंकि वह सभी लिखित और प्रदर्शन कलाओं की दाता हैं।

घरों में, जिनके बच्चे पढ़ते हैं और सभी शैक्षणिक संस्थानों में, वसंत पंचमी को देवी सरस्वती की स्तुति में गाए प्रार्थना के द्वारा मनाया जाता है, जिनकी मूर्ति को पीले या सफेद फूलों और मालाओं से सजाया जाता है। संगीत और कलाओं के अध्ययन सामग्री और उपकरणों को देवता के सामने रखा जाता है। इस दिन कोई अध्ययन नहीं किया जाता है क्योंकि यह माना जाता है कि देवी अध्ययन सामग्री को आशीर्वाद दे रही हैं। शैक्षिक संस्थान विशेष कार्यों और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन करते हैं जो देवी सरस्वती को समर्पित हैं। पीले रंग की मिठाइयाँ देवी को अर्पित की जाती हैं और बच्चों में वितरित की जाती हैं। शिक्षक पीले रंग के कपड़े पहनते हैं।


जिन बच्चों को सीखने की शुरुआत की जाती है, वे इस दिन पाठ्यक्रम के पहले अक्षर लिखते हैं। दक्षिण में, यह रेत पर या उस पर चावल के साथ एक ट्रे पर लिखा जाता है।

विवाह के लिए और गृह वार्मिंग समारोह (P गृहप्रवेश ’) के लिए दिन शुभ माना जाता है। इस शुभ दिन पर, भक्त सुबह जल्दी उठते हैं और स्नान करने और पीले कपड़े पहनकर सूर्य देव की पूजा करते हैं। वसंत के मौसम में देवी और अशर का स्वागत करने के लिए, महिलाएं अपने घरों के द्वार पर सुंदर फूलों की डिजाइन बनाती हैं। देवता पीले या सफेद रंग के कपड़े पहने हैं और उनके सामने एक 'पूजा कलश' स्थापित है। देवी की पूजा की जाती है और धार्मिक गीत गाए जाते हैं। भक्त देवता के चरणों में रंग और पीले रंग की मिठाई चढ़ाते हैं। बाद में, यह लोगों के बीच वितरित किया जाता है। बच्चे रंगीन पतंग उड़ाते हैं और आसमान रंग की फुहारों के साथ जीवंत हो उठता है। महिलाओं ने पेड़ों पर बंधे रंग-बिरंगे झूलों पर झूलते हुए पारंपरिक लोक गीत गाए। राजस्थान में, लोग पीले पीले चमेली के फूलों की माला पहनते हैं।

वसंत पंचमी केवल भारत में ही नहीं, बल्कि नेपाल और बाली में भी मनाई जाती है।

पूजा विधियों और अनुष्ठानों के बारे में अधिक जानने के लिए हमारे विशेषज्ञ ज्योतिषियों से ऑनलाइन परामर्श करें

त्योहार और उनके अनुष्ठानों के बारे में अधिक जानने के लिए हमारे विशेषज्ञ ज्योतिषियों से ऑनलाइन परामर्श करें।
वसंत पंचमी तिथि और मुहूर्त 2020
वसंत पंचमी 2020

29ndJanuary

वसंत पंचमी पूजा मुहूर्त - 10:45 से 12:34 तक



वसंत पंचमी का त्यौहार आते ही प्रकृति में बहुत ही सुंदर और आकर्षित करने लगती है. और पेड़ों पर बेर पक कर तैयार हो जाते है. चारो और रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं. और मानव पशु पक्षी उलास से भर जाते है. हर दिन नयी उमंग से सूर्योदय होता है. और नयी चेतना प्रदान कर अगले दिन फिर आने का आश्वासन देकर चला जाता है. ये दिन सभी प्राणी जीव के लिए बहुत ही अच्छे होते है. प्राचीनकाल से ही इसे ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का जन्मदिवस माना जा रहा है. देवी द्वारा बच्चे को बुधि और ज्ञान की प्राप्ति के लिए प्राथना करते है. माना जाता है, की वसंत पंचमी के दिन अगर बच्चे को किसी भी तरह का दोष है, तो उसकी जीभ पर केसर से चांदी की सलाई से ऐ बिज मंत्र लिखे तो उसके कस्ट दूर हो जाते है. इस दिन गरीबो को पंसिल, कोपी, पैन दान करे. इस त्यौहार को स्कुलो में भी बड़ी उत्साह के साथ मनाते है. और देवी माँ की पूजा अराधना करते है. कलाकारों और शिक्षाविद भारतीय के लिए ये त्यौहार बहुत ही प्रिय है. इसे भारत के अधिकाँश राज्य में इस त्यौहार को लेकर विशेष प्रकार का पकवान बनाते है. वैसे ही पंजाब में इस त्यौहार पर खेतो में विशेष प्रकार के पकावन बना कर गरीबो को खिलाते है. पर तरह-तरह के प्रोग्राम का आयोजन करते है.


इस त्योहारों से हमें अतीत की अनेक प्रेरक घटनाओं की भी याद दिलाता है. क्योंकि इस दिन रावण द्वारा सीता के हरण के बाद श्री राम द्वारा उसकी खोज में दक्षिण दिशा की और बढे थे. और इस दिन हमे त्रेता युग से जोड़ता है. और भगवान श्री राम सीता की खोज के लिए ये शबरी नामक भीलनी के पास गए तो उसने भगवान श्री राम को जूठे बेर खिलाए थे. और जहा भीलनी रहती थी उस स्थान का नाम दंडकारण्य है. यह क्षेत्र अब गुजरात और मध्य प्रदेश में है यही पर ही सबरी माता का मंदिर भी स्थित है. जो पर्यटक का आकर्षण का केंद्र है. यहाँ सालाना लाखो लोग विदेशो से घुमने आते है.

जन्म दिवस

वसंत पंचमी के दिन ही बहुत से माहान हस्तियों का जन्म हुआ था. जैसे राजा भोज अपने जन्म दिवस पर और वसंत पंचमी के दिन ही एक बड़ा उत्सव करवाते थे. जिसमें पूरी प्रजा के लिए एक बड़ा प्रीतिभोज रखा जाता था. ये प्रतिभोज 40 दिन तक चलता था. और इसी दिन ही हिंदी साहित्य के कवि सूर्यकांत तिरपाठी का भी जन्म हुआ था. वे बहुत ही दयालु थे वे अपने पैसे और वस्त्र खुले मन से निर्धनों को दे देते थे. ऐसे ही बहुत से महान हस्ती का जन्म वसंत पंचमी के दिन हुआ है.

वसंत पंचमी और प्रेम बाण

अगर कोई किसी से प्रेम करने लगता है, तो सारी दुनिया में हृदय के चित्र में बाण चुभाने का प्रतीक उपयोग में लाया जाता है. प्रेम का बाण यदि आपके हृदय में चुभ जाए तो आपके हृदय में पीड़ा होगी. और वह पीड़ा ऐसी होगी कि उसे आप छोड़ना नहीं तो दूर की बात आप उसकी तरफ देखना भी नहीं चाहोगे लेकीन इस पीड़ा में आनंद जैसी होगी. की आप इस आनद रूपी पीड़ा में घुसते ही चले जाओगे. ये सबसे ज्यादा वसंत ऋतु के समय में ही अत्यधिक प्रभावित होता है. मौसम का सुहाना होना इस मौके को और भी बेहतरीन बना देता है. जिससे प्रेम की भावना तो जाग्रित होगी.



Short Essay On Basant Panchami In Hindi Language – Basant Panchami Short Essay In Hindi


भारत में वसंत ऋतु को सबसे सुहावना मौसम माना जाता है। प्रकृति में सब कुछ सक्रिय होता है और पृथ्वी पर नए जीवन को महसूस करते हैं। वसंत ऋतु सर्दियों के तीन महीने के लम्बे अन्तराल के बाद बहुत सी खुशियाँ और जीवन में राहत लाती है। वसंत ऋतु सर्दियों के मौसम के बाद और गर्मियों के मौसम से पहले, मार्च, अप्रैल और मई के महीने में आती है। वसंत ऋतु का आगमन सभी देशों में अलग-अलग होने के साथ ही तापमान भी अलग-अलग देशों में अलग-अलग होता है। कोयल पक्षी गाना गाना शुरु कर देती है और सभी आम खाने का आनंद लेते हैं। प्रकृति में सभी जगह फूलों की खूशबू और रोमांस से भरी हुई होती हैं, क्योंकि इस मौसम में फूल खिलना शुरु कर देते हैं, पेड़ों पर नए पत्ते आते हैं, आसमान पर बादल छाए रहते हैं, कलकल करती हुई नदियाँ बहती है आदि। हम कह सकते हैं कि, प्रकृति आनंद के साथ घोषणा करती है कि, वसंत आ गया है: अब यह उठने का समय है।

इस मौसम की सुन्दरता और चारों ओर की खुशियाँ, मस्तिष्क को कलात्मक बनाती है और आत्मविश्वास के साथ नए कार्य शुरु करने के लिए शरीर को ऊर्जा देती है। सुबह में चिड़ियों की आवाज और रात में चाँद की चाँदनी, दोनों ही बहुत सुहावने, ठंडे और शान्त हो जाते हैं। आसमान बिल्कुल साफ दिखता है और हवा बहुत ही ठंडी और तरोताजा करने वाली होती है। यह किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण मौसम होता है, क्योंकि उनकी फसलें खेतों में पकने लगती हैं और यह समय उन्हें काटने का होता है। सभी आनंद और खुशियों को महसूस करते हैं क्योंकि, यह मौसम त्योहारों का मौसम है; जैसे- होली, राम नवमीं, हनुमान जयंती, गुड फ्राइडे, ईस्टर, बिहू, नवरोज, बैसाखी आदि



Essay On Basant Panchami Festival In Hindi

बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है। मां सरस्वती को विद्या की देवी भी कहा जाता है। यह पूजा माघ महीने के शुक्ल पंचमी के दिन मनाया जाता है। यह पर्व जनवरी या फरवरी माह में आता है। सरस्वती पूजा के दिन विद्यार्थी और बहुत सारे लोग मां सरस्वती की वंदना करते हैं। बहुत सारे स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की प्रतिमा बैठाई जाती है और पूजा की जाती है। छात्र और छात्राएं सरस्वती पूजा के दिन सुबह-सुबह नहा-धोकर मां सरस्वती की पूजा करते हैं और फिर प्रसाद ग्रहण करते हैं।
इस दिन बहुत सारे लोग सभी जगहों पर जाकर मां सरस्वती की प्रतिमा का दर्शन करते हैं। स्कूल में सरस्वती पूजा का आयोजन भव्य तरीके से किया जाता है। इसमें सभी शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं और आने वाले सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण करते हैं। सरस्वती पूजा में छात्र-छात्राएं मां सरस्वती से अधिक से अधिक विद्या प्राप्त करने की विनती करते हैं।

आजकल ऐसा देखा गया है कि सरस्वती पूजा में बहुत सारी जगहों में पांडाल लगाए जाते हैं और वहां गाने बजाए जाते हैं और गानों पर बहुत सारे स्टूडेंट डांस करते हैं। इससे इस पूजा की प्रतिष्ठा धीरे-धीरे गिरती जा रही है। छात्र-छात्राएं और अभिभावकों को यह चाहिए कि वह इस पूजा की पवित्रता को बनाए रखें।

सरस्वती पूजा में सरस्वती जी की प्रतिमा एक या दो दिन के लिए बैठाई जाती है और फिर पूजा के दूसरे या तीसरे दिन प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। विसर्जन के समय बहुत सारे लोग सड़कों पर जा रही सरस्वती जी की प्रतिमा को देखते हैं और नमन करते हैं। बहुत सारे स्टूडेंट काफी हर्षोल्लास के साथ मूर्ति का विसर्जन करते हैं।


Basant Panchami Long Essay In Hindi – Basant Panchami Story In Hindi


प्रस्तावना – संसार के प्रत्येक देश में त्यौहारों की अपनी-अपनी परंपरा है भारत तो त्योहारों का धनी है। यहां प्रत्येक मास और पक्ष में कोई ना कोई त्यौहार अवश्य आ जाता है। यदि माघ में बसंत पंचमी है तो फागुन में होली चैत में रामनवमी है तो वैशाख में वैशाखी। जेष्ठ में गंगा दशहरा है तो सावन में रक्षाबंधन का उत्सव मनाया जाता है। इन सभी त्योहारों में बसंत पंचमी का विशेष महत्व है ।इसे श्री पंचमी भी कहते हैं। यह पूजा पूर्वी भारत -पश्चिमोत्तर -बांग्लादेश -नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है।

समय – यह त्यौहार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. इस समय शरद ऋतु की समाप्ति तथा वसंत ऋतु का आगमन होने से मौसम बड़ा सुहावना हो जाता है. पेड़ों में नए -नए पत्ते फूल तथा खेतों में पीली सरसों बड़ी ही मन भावनी लगती है इस समय ना तो अधिक सर्दी होती है। और ना अधिक गर्मी । शीतल मंद सुगंध पवन चलने लगती है। सारे पशु -पक्षी लता -वृक्ष स्त्री -पुरुष आनंद मग्न से दिखाई पड़ते हैं। ऐसे सुहाने मौसम में बसंत पंचमी का पर्व आता है । बसंत ऋतु को ऋतुराज कहते हैं तथा गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि रितुओं में मैं बसंत हूं।



सरस्वती पूजा 2020 – बसंत पंचमी के दिन ज्ञान तथा विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है. प्रत्येक शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों द्वारा पूरी तमन्ना के साथ सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाता है। छात्र गढ़ पूजा के कुछ दिनों पूर्व से ही साज सज्जा के कार्यों में संलग्न हो जाते हैं। पूजा के दिन छात्र-छात्राएं प्रातः कालीन तैयार होकर पूजा पंडालो अथवा पूजन स्थल पर एकत्रित हो जाते हैं। मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की जाती है. बच्चे अपनी पुस्तके भी पूजा के सम्मुख रखते हैं. तत्पश्चात विधिवत पूजन कार्य संपन्न कराया जाता है. लोग पुष्पांजलि देते हैं मौसमी फल फूल धूप दीप खीर चंदन वस्त्र तिल आदि वस्तुएं मां के चरणों में समर्पित करते हैं. इसके बाद विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के द्वारा ज्ञान दायिनी मां सरस्वती की आराधना की जाती है यहां एक प्रार्थना प्रस्तुत है। सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद प्रसाद वितरण किया जाता है

महत्व – अनेक पर्व के साथ बसंत पंचमी पर्व का भी विशेष महत्व है. इस पर्व पर केवल बच्चे ही नहीं अपितु संगीत व साहित्य के महान साधक भी बड़े हर्षोल्लास के साथ आनंद दायिनी मां की पूजा में शामिल होते हैं. संगीत के साधक राग वसंत तथा बहार गाते हैं तथा अपनी संगीत व साहित्य की साधना को मां के चरणों में समर्पित करते हैं। इस पर्व पर अनेक सुंदर पूजा स्थल सजाए जाते हैं जो देखने में बड़े ही मनोहर लगते हैं इसके अतिरिक्त इस त्यौहार के आने पर हमारे जीवन में एक नवीन उत्साह आ जाता है।

उपसंहार – यद्यपि कि यह पावन पर्व है लेकिन कुछ शरारती तत्वों द्वारा पूजा के लिए आयोजन कार्यो द्वारा चंदा लेने का प्रयास किया जाता है. यह लोग चंदा वसूली के नाम पर दुकानदारों वाहन चालकों तथा आम जनता से वसूली करते हैं. ऐसे लोगों का बुनियादी शिक्षा से कोई सरोकार नहीं होता लेकिन गलत कर्मो को पूरा करने के लिए पूजा का सहारा लेते हैं. हमें ऐसे लोगों का विरोध करना चाहिए तथा पूजा की पावनता को अपवित्र होने से बचाना चाहिए.”


Basant Panchami Essay Hindi Language – An Essay On Basant Panchami In Hindi Language


भारत त्योहारों का देश है ,यहाँ हर त्योंहारों धार्मिक अवसरो को ध्यान मे रखकर एवं ऋतुओ के बदलने के साथ साथ इन्ही मे से एक है बसंत पंचमी|यह त्योहार हमारे देश मे बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है|बंसत पंचमी के दिन ज्ञान की देवी सरस्वती जी का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन सरस्वती जी की पुजा अर्चना की जाती है |पुरातन युग मे ,इस दिन राजा समानतो के साथ हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवआलय पहुँचते थे | वहा विधि पूर्वक कामदेव की पुजा की जाती थी और देवताओ पर अन्न की बलिया चड़ाई जाती थी |

बसंत पंचमी पर हमारी फसल गेहु जौ चना आदि तैयार हो जाती हैं इसलिए इसकी खुशी मे सभी भारतीय बसंत पंचमी का त्योहार मानते है |संध्या के समय बसंत का मेला लगता हैं जिसमे लोग परस्पर एक दूसरे के गले से लगकर आपस मे मेल जोल तथा आनंद का प्रदर्शन करते हैं |कही कही पर विशेष रूप से गुजरात मे पतंगे उड़ाने का माहौल रहता है |इस दिन लोग पीले कपड़े पहनते है और पीले फूलो से माँ सरस्वती की पुजा अर्चना करते है|लोग इस पर्व पर पीले रंग का भोजन करते है अर्थात मिठाइया खाते है |

ऋतुराज बसंत का बड़ा महत्व है |इसकी छटा निहारकर जड़ चेतन सभी मे नव जीवन का संचार होता हैं |सभी मे अपूर्व ऊर्जा और आनंद की लहर आती है |स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह ऋतु बड़ी ही उपयुक्त हैं |इस ऋतु मे प्रात:काल घूमने से मन मे प्रसन्नता और देह मे स्फूर्ति आती हैं |स्वस्थ और स्फूर्ति दायक मन मे अच्छे विचार आते हैं |

बसंत ऋतु ऋतुयों का राजा कहलाया जाता हैं |इसमे प्रक्रति का सौन्दर्य सभी ऋतुयों से अधिक होता हैं|वन उपवन भांति भांति के पुष्पो से जगमगा उठते हैं |गुलमोहर ,चम्पा, सूरजमुखी और गुलाब के पुष्पो के सौन्दर्य से आकर्षित रंग बिरंगी तितलियों और मधु मक्खियों मे मधुर रसपान की होढ़ सी लगी रहती हैं |इनकी सुंदरता देख कर मनुष्य भी झूम उठता हैं|

यह दिन विद्यार्थियो के लिए भी विशेष महत्वपूर्ण दिन होता हैं |इस दिन सभी विद्यालयों मैं माँ सरस्वती की अर्चना की जाती हैं और उनके आशीर्वाद से ज्ञान से आगे बदने की प्रेरणा ली जाती हैं |इस तरह बसंत पंचमी का त्योहार हर्ष उल्लास के साथ पूर्ण होता हैं

Basant Panchami Essay In Hindi :

 वसंत पंचमी जो की हिन्दुओ का विशेष त्यौहार माना जाता है. लेकिन आपको बात दे की इसे हिन्दू ही नहीं बल्कि अन्य धर्मो के लोग भी बड़ी उत्साह के साथ मनाते है. इसे माघ सुक्ल पक्ष की पंचमी को मानाया जाता है. इस दिन विद्या की देवी सरस्वती जी की पूजा की जाती है. इस त्यौहार को भारत में तो मानते ही है, लेकिन इसे पूर्वी भारत में बड़ी धूम धाम से मानाते है. इस त्यौहार को पीले रंग का प्रतीक माना जाता है. इस दिन स्त्रिया पीली वस्त्र धारण करते है जब फूलों पर बहार आ जाती है, तो खेतो में सरसों का सोना जैसा चमकने लगते है. और भी जौ और गेहू भी पकने के लिए तैयार हो जाते है. वसंत पंचमी के दिन लोग पतंग उड़ाते है. और वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा की जाती है. वसंत पंचमी के दिन सूर्य उत्रायण होना शुरू हो जाता है. जिसकी पिली किरन इस बात का संकेत देता है की सूर्य की तरह घम्भीर और प्रखर होना चाहिए.


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