सकारात्मक सोच भाग 13:-सन्यास से मिलता है सौंदर्य - EM

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Wednesday, 8 August 2018

सकारात्मक सोच भाग 13:-सन्यास से मिलता है सौंदर्य

सकारात्मक सोच  भाग 13:-सन्यास से मिलता है सौंदर्य

यह आलेख  सकारात्मक सोच  भाग 13 :-सन्यास से मिलता है सौंदर्य ,सकारात्मक सोच के बारे में है मेरे बारे में हमारे जीवन में सोच का बहुत महत्व होता है। जब हमारी सोच सही होती है या जब हम सकारात्मक सोचते हैं तो हमारे सभी काम भी सही तरीके से पूरे हो जाता है। जे व्यक्ति की सोच, सकारात्मक (पॉज़िटिव) सोच। जीवन, यह एक हमेशा चलते रहना चाहते हैं, सकारात्मक सोच आपको और अधिक खुशी, शांति, प्यार, सफलता और कई अन्य लोगों को अपना आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान, साहस, आप डर से मुक्त महसूस करते हैं जो आप वर्तमान में सामना करते हैं। या आप अपने जीवन में कुछ भी करना चाहते हैं लेकिन आप किसी स्थान पर फंस गए हैं तो सकारात्मक ऊर्जा आपको इससे बाहर निकलने में मदद करती है हिंदी में सकारात्मक सोच से कई अलग-अलग लाभ इसलिए सकारात्मक रहें और अपने जीवन में आगे बढ़ें इस प्रकार के लेख आपको आपकी मदद करते हैं जीवन जहां ढेर सारी खुशियों के बीच में दुःख भी आते हैं। बहुत सारी खुशियों के बाद, दुःख भी उत्पना ही आता है और वह चक्कर फिर से चालू होता है,सकारात्मक सोच  भाग 13:-सन्यास से मिलता है सौंदर्य"

सकारात्मक सोच  भाग 13:-सन्यास से मिलता है सौंदर्य
सकारात्मक सोच  भाग 13:-सन्यास से मिलता है सौंदर्य




सन्यास से मिलता है सौंदर्य


"सन्यास वह घटना है जो मनुष्य के अंत कारण को सुंदर बना देती है यही कारण है कि सन्यासी कभी बुरा नहीं होता वह बिना किसी साज सिंगार के चिरयुवा रहता है"

जो सन्यास तुम्हें माया मुंह से छुड़ाकर करुणा दया से भी दूर कर देता हो समझना चूक गए भूल हो गई माया ममता से छुड़ाने का प्रयोजन ही इतना है कि तुम्हारी जीवन ऊर्जा करुणा बने

सन्यासी अपूर्व सुंदर हो जाता है संयास जैसा सौंदर्य देता है मनुष्य को और कोई चीज नहीं देती संन्यस्त होकर तुम सुंदर ना हो जाओ तो समझना कि कोई भूल चूक हो रही है सन्यासी का कोई श्रृंगार नहीं है सन्यास इतना बड़ा सिंगार है कि फिर किसी और सिंगार की कोई जरूरत नहीं है

तुमने देखा कि सांसारिक व्यक्ति भोगी है जवानी में शायद सुंदर होता हो लेकिन जैसे-जैसे बुढ़ापा आने लगता है आज सुंदर होने लगता है लेकिन उससे उलट घटना घटती है Sanyasi के जीवन में जैसे-जैसे सन्यासी विद्रोह होने लगता है वैसे वैसे और सुंदर होने लगता है क्योंकि सन्यास के कोई वृद्धा अवस्था होती ही नहीं सन्यास कभी बुरा होता नहीं सन्यास तो चीर युवा है।


 इसलिए तो हमने बुद्ध और महावीर की जो मूर्तियां बनाई है वह उनकी युवावस्था की बनाई है इस बात की खबर देने के लिए की सन्यासी चिरयुवा है हमने अपूर्व सौंदर्य से भरी मूर्तियां बनाई है महावीर और बुद्ध की उनके पास कुछ भी नहीं है ना कोई साज है ना सिंगार है कृष्ण को तो सुविधा है कृष्ण की मूर्ति को तो हम सजा लेते हैं मोर मुकुट बांध देते हैं रेशम के वस्त्र पहना देते हैं घुंघरू पहना देते हैं हाथ में कंगन डालकर मोतिया कहार लटका देते हैं पर बुद्ध और महावीर के पास तो कुछ भी नहीं है बुद्ध के पास तो एक चीज़ है जिसको उड़ा हुआ है महावीर के पास तो वह भी नहीं लेकिन फिर भी अपूर्व सौंदर्य है ऐसा सौंदर्य जिसको किसी भी सजावट की कोई जरूरत नहीं संसार तो छोड़ना है संसार की माया ममता भी छोड़नी है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि सन्यास कठोर बनाते तुम्हें कृष्ण बना दे तुम्हें कि तुम्हारे हृदय को पत्थर बना दे तब तो तुम जो गए अक्सर ऐसा होता है अक्सर तुम्हारे तथाकथित साधु सन्यासी और महात्मा जिस दिन मोह माया छोड़ते हैं संसार का उसी दिन दया माता दया करुणा भी छोड़ देते हैं यह तथाकथित सन्यासी रूखे सूखे लोग हैं उन्होंने माया मोह छोड़ी उसी दिन से वह डर गए हैं उन्होंने अपनी को सुख आलिया भट्ट के कारण वह हसीन हो गए हैं उन पर नए पत्ते लगते हैं नाम है फूल आते हैं इसलिए तो उनके जीवन में तुम्हें सौंदर्य दिखाना पड़ेगा उनके जीवन में एकरूपताव है मरुस्थल जैसे हैं झुक गए प्रश्न से थोड़ी ही विरोध था पतंजलि ने कहा ना रसोई वह सत्य तो रहस्यमय है वह परमात्मा तो रस भरा है Sanyasi रस से थोड़ी ही विरोध है इस संसार में व्यर्थ ना बरस दया बनकर बैठे करुणा बनकर बहे सेवा बनकर बहे रस तुम्हें भिखारी ना बनाए सम्राट बना है याद रखना बनाए दानी बनाए रस तुम लुटाओ रस तुम दो ।

इसलिए जो सन्यास तुम्हें माया मुंह से छुड़ाकर करुणा दया से भी छुड़ा देता हूं समझना छुप गए तीर निशाने पर ना लगा गलत जगह लग गया भूल हो गई माया ममता से छुड़ाने का प्रयोजन ही इतना है कि तुम्हारी जीवन ऊर्जा करुणा बने माया ममता छूट गई और करुणा बनी नहीं तो संसार भी गया और सत्य भी ना मिला तुम घर के ना बचे न घाट के तुम कहीं के ना रहे संसार छूट गया और सत्य मिला नहीं है बाहर का सौंदर्य छूट गया और भीतर का सौंदर्य मिला नहीं है अटक गए रसधार ही सूख गई मरुस्थल हो गए ज्यादा से ज्यादा कुछ कांटे वाले झाड़ पैदा हो जाते हो मरुस्थल में तो हो जाते हो बस और कुछ नहीं ।

ना ऐसे व्हिच पैदा होते हैं जिनमें किसी राहगीर को छाया मिल सके ना ऐसे व्हिच पैदा होते हैं कि रसदार फल लगे और किसी की भूख मिट सके ना किसी की च*** मिट्टी ना ही किसी की प्यास मिटती रूखे सूखे यह लोग और इनकी तुम पूजा किए चले जाते हो इनकी पूजा खतरनाक है क्योंकि इनको देख देख कर धीरे-धीरे तुम भी रूखे सूखे हो जाओगे ।

 इस देश में यह दुर्भाग्य खूब घटा इस देश का सन्यासी धीरे-धीरे जीवन की करुणा ० हो गया उसे करुणा ही नहीं आती लोग मरते हो तो मरते रहे लोग करते हो तो सर दे रहे वह तो कहता हमें क्या लेना देना हम तो संसार छोड़ चुके संसार छोड़े हो वह तो ठीक लेकिन करुणा छोड़ चुके तो फिर तुम बुद्ध की करुणा ना समझोगे महावीर की अहिंसा ना समझोगे और क्राइस्ट की सेवा न समझोगे इसे कसौटी मानकर चलना करुणा बन्नी ही चाहिए तो ही समझना कि सन्यास ठीक दिशा में यात्रा कर रहा है|

मुझे उम्मीद है कि आपको यह सकारात्मक लेख सन्यास से मिलता है सौंदर्य , पसंद है अंदर की आवाज़ें अनसुना ना करें ,सकारात्मक सोच भाग 10:-प्रार्थना का सच ताकि आप प्रेरित हो जाएं और अपने जीवन में मुस्कुराते रहें|

आने के लिए धन्यवाद !!




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