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Saturday, 29 September 2018

10 anmol vachan in hindi & Best 20+ anmol vachan

सुविचार संग्रह hindi :राह के अड़ेंगे

यह आलेख सकारात्मक सोच  सुविचार संग्रह hindi :राह के अड़ेंगे ,10 anmol vachan in hindi ,के बारे में है मेरे बारे में हमारे जीवन में सोच का बहुत महत्व होता है। जब हमारी सोच सही होती है या जब हम सकारात्मक सोचते हैं तो हमारे सभी काम भी सही तरीके से पूरे हो जाता है। जे व्यक्ति की सोच, सकारात्मक (पॉज़िटिव) सोच। जीवन, यह एक हमेशा चलते रहना चाहते हैं, सकारात्मक सोच आपको और अधिक खुशी, शांति, प्यार, सफलता और कई अन्य लोगों को अपना आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान, साहस, आप डर से मुक्त महसूस करते हैं जो आप वर्तमान में सामना करते हैं। या आप अपने जीवन में कुछ भी करना चाहते हैं लेकिन आप किसी स्थान पर फंस गए हैं तो सकारात्मक ऊर्जा आपको इससे बाहर निकलने में मदद करती है हिंदी में सकारात्मक सोच से कई अलग-अलग लाभ इसलिए सकारात्मक रहें और अपने जीवन में आगे बढ़ें इस प्रकार के लेख आपको आपकी मदद करते हैं जीवन जहां ढेर सारी खुशियों के बीच में दुःख भी आते हैं। बहुत सारी खुशियों के बाद, दुःख भी उत्पना ही आता है और वह चक्कर फिर से चालू होता है,सुविचार संग्रह hindi :राह के अड़ेंगे"




राह के अड़ेंगे


कुछ भी करने निकले 24 स्पीड ब्रेकर हमेशा तैयार मिलेंगे कुछ लोग तो छूटते ही कहेंगे यह तो तेरे बस का नहीं उनकी मानें तो आप कुछ नया कर ही नहीं पाएंगे यहां बुद्ध के उन शिष्यों को याद आती है जिन्होंने उपदेश देने के लिए निकलने से पहले कहा बनते हम बादलों की तरह बरसते हवा की तरह सर्साने सूर्य की तरह प्रकाश बांटने चंद्रमा की तरह चांदनी बिखेरने के लिए चले हैं हम अपने कर्तव्य पालन के आनंद में इतनी रसपी भर रहेंगे कि किसी का उपहास तिरस्कार समझने का अवकाश ही हमें नहीं रहेगा उन शिष्यों की बातें आज कहीं ज्यादा प्रासंगिक हैं यह दौर नई सोच का है चीजों को पूरी तरीके से करना है हम जितने बेहतर तरीके से काम को करेंगे उतना ही बेहतर दाम वह संतोष हमें मिलेगा ऐसे में हमारी असंतुष्टि का स्तर भी ऊंचा रहता है और हम श्रेष्ठ की यात्रा पर रहते हैं यहां एक लोहार की कथा याद आती है उसे एक व्यापारी ने ऐसे औजार बनाने को कहा था जो सबसे बढ़िया हो लोहार ने पैसे लौटाए हुए कहा मैं अपनी पूरी क्षमता से जो बनाता हूं उसे ही सबसे बढ़िया मानता हूं उससे बढ़िया मैं नहीं बना सकता अपने काम के प्रति हम तो ना आए मगर इतना जरूर हो कि उसे करने के समय किसी तरह की ढिलाई ना बरती गई हो अमेरिकी पत्रकार और विचारक डेविड बिक्री के शब्दों में अपना काम करने में सबसे बड़ी बाधा है दूसरों के नकारात्मक हस्तक्षेपों का स्वागत करना आपको जानने वाले स्पीड ब्रेकर हो सकते हैं यदि आपके किसी काम को शिकार नहीं करते वह आप पर ईंट बरसाते हैं तो आपके पास एक सर्वश्रेष्ठ रास्ता है।



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आने के लिए धन्यवाद !!।


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नया सोचने और करने में डर कैसा



"हमें कुछ नया करने से डरना नहीं चाहिए इससे आपके अनुभव के दायरे में विस्तार ही होगा यही व्यवहारिक समझ आगे चलकर आपको बेहतर बनाइए"

सिर्फ दवाइयां ही मनुष्य को सेहतमंद बनाएं नहीं रख सकती उन्हें भोजन आवास और रोजगार भी चाहिए यह कहना है हल्दी 5 नामक समाजसेवी संस्था के संस्थापक मानसिक भाट का वह अपनी संस्थान के जरिए समाज की इस मूल समस्या को दूर करने में जुटे हैं अपने इस कार्य से दुनिया भर के लोगों को प्रेरित करते हुए हैं उन्होंने चिकित्सा सहायक पाने वाले 4000000 लोगों को समाज सेवा से जुड़ा है इसके लिए फॉक्स ने उन्हें अपनी 30030 सूची में जगह दी है इस आधुनिक युग में सोच का दायरा विस्तृत होने के बावजूद जब हम अपनी मौलिक दृष्टि से कट जाते हैं ऐसे में दूसरों की बेहतरी के लिए सोचने वाले मानिक दुनिया में मौलिक कार्य के लिए पहचाने गए हैं

कैसे हुए प्रेरित मानिक भाट एक कश्मीरी परिवार से हैं उनके माता पिता चिकित्सक थे परिवार ने कड़े संघर्ष के दिन देखे थे वह आगे चलकर परिवार के साथ कश्मीर से अमेरिका जाकर बस गए माता-पिता की देखरेख में मानिक ने चिकित्सक बनने का सपना देखा उन्हें जॉब हॉट किंग्स नाम के प्रसिद्ध विश्वविद्यालय में दाखिला भी मिल गया पर उन्हें पर कहां पता था कि उनके जीवन में एक नया मोड़ आने वाला है मानिक विश्वविद्यालय में पढ़ने के साथ-साथ छोटे-छोटे चिकित्सालय में भी जाया करते थे उन्होंने देखा कि चिकित्सालयों में आने वाले कई मरीज गरीब थे उन्होंने गौर किया कि यहां कई ऐसे लोग हैं जो सरकार द्वारा दी गई मूल सुविधाओं से वंचित हैं उन्हें इसे विशेष जानकारी भी नहीं थी मानिक ने इस दिशा में सोच कि क्यों ना ऐसा कुछ किया जाए जिससे शहर में रहने वाले गरीबों तक सभी मूल सुविधाओं को पहुंचाया जा सके माणिक समझते थे कि यह मूल सुविधाएं हैं उनका परिचय बेहतर स्वास्थ्य करा सकती है मानिक चाहते थे कि एक ऐसी संस्था का निर्माण किया जाए जो लोगों को अनुसूचित खानपान के दुष्प्रभावों से परिचित करा सके इसके लिए मानिक को लोगों की मानसिकता में बदलाव लाना था इस उद्देश्य के लिए उन्होंने चिकित्सक बनने के सपने को भुला दिया उन्होंने हल्दी नामक एक संस्था बनाई जिसका मुख्य उद्देश्य वंचितों को उनकी जरूरतें पूरी करने में मदद करना था मानिकराव समाजसेवियों के साथ एक टीम बनाई इसके जरिए अकेले अमेरिका के टीचरों के वंचित को उनका हक दिला रहे हैं।


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साहस का मतलब


साहस को अमूमन खास लोग से जोड़कर देखा जाता है इतिहास में हुए लोग ही साथ ही माने जाते हैं जिन्होंने बड़े बड़े कारनामे किए पर गौर करें तो असली साहसी आप ही मिल जाएंगे ऐसे लोग जिन्होंने प्रतिकूल हालात से समझौता नहीं किया और आगे बढ़ते रहे कोई जो गलत होता हुआ देख नहीं सकते और तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं ।



ऐसे लोग के सामने ही मैन और spider-man जैसे काल्पनिक पात्रों के कारनामे नौटंकी ज्यादा दिखते हैं दरअसल हम सांस का अर्थ हमेशा स्तही ही तौर पर लेते हैं सत्साहस को बड़े कारनामे से नहीं जोड़ा जाना चाहिए यह हमारी जीवनशैली में शामिल होना चाहिए यह मन और भावना के स्तर पर फोन तो अच्छा है हर छोटी-बड़ी काम को यही तरह से पूरा करना चाहती होने का परिचायक है एक बच्चा जो रोजाना अपना होमवर्क सही तरीके से करता है एक किसान जो धूप बारिश में भी अपना काम बंद नहीं करता या फिर दशरथ मांझी जो हर दिन थोड़ा-थोड़ा पत्थर तोड़ पहाड़ के बीच से रिश्ता निकाल देते हैं यह सब साहसी हैं सास बहू यामी है इसके कई रंग है जैसे महात्मा गांधी अहिंसक होने को साहस का चरम मानते थे तो सचिन तेंदुलकर के लिए साहसी होनसाहस का मतलब है हर स्थिति में अपनी आत्म बल को कायम रखना और अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प रहना प्राचीन चीनी कवि लाउड साहस के एक और आयाम की बात करते हैं वह साहस को प्यार से जोड़ते हैं प्यार हमें नकारात्मक वृद्धि या से दूर रखता है और इस राह पर चलते हुए हम सहाशी बन जाते हैंता है और इस राह पर चलते हुए हम साहसी बन जाते हैं।


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फिर से उठना




कई बार सच्चाई हमारे सामने बड़ी कुर्ता के साथ आती है ऐसे में आपकी प्रतिक्रिया मायने रखती है देखना होता है कि आप सच के सामने डटकर खड़े होते हैं या नहीं गिरने के बाद फिर से उठ पाते हैं या नहीं इरफ़ान ख़ान भी स्तब्ध रह गए जब उन्हें पता चला कि उन्हें न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर है इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या ने स्टीव जॉब्स को हमसे छीन लिया था जब इरफान को इसके बारे में पता चला तो हार मानने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि वह कम बैक करेंगे। anmol suvichar
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क्रिकेटर इमरान खान भीतर चौक गए थे जब उन्हें अपनी मां की कैंसर के बारे में पता चला लेकिन वह घबराएं नहीं खुद को टूटने नहीं दिया उन्होंने कहा कि अल्लाह पर यकीन ने सारी डर खत्म कर दिए बकौल इमरान अगर आप अपने अंदर की यात्रा संदेश और सवालों के जरिए ईश्वर की ओर आते हैं तो भरोसा और मजबूत हो जाता है यहां विक्की पोस्टर भी आदर्श हैं विक्की को 7 साल की उम्र में कैंसर हो गया था लेकिन उन्होंने इस पर जीत हासिल की आज विक्की 47 साल की है और उन्होंने बायो मेडिकल साइंस में पीएचडी की और कैंसर के खात्मे से जुड़ी research  में जुटी है उन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल करते ही कहा प्यारे कैंसर मैंने तुम्हें 7 साल की उम्र में हरा दिया था और आज मैंने कैंसर रिसर्च में आने पीएचडी की है अब क्या कहते हो मन से हारना ही मौत की पहली निशानी है जिंदगी बॉक्सिंग खेल की तरह है जो हार का ऐलान आप को गिराने पर नहीं होता पर वह तो आपकी वापस उठने से इनकार करने पर होता है दुनिया के सारे वहां लोग इसी के उस्ताद रहे हैं।

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एक घंटा रोजाना


TV देखते मोबाइल पर स्टेटस करते हुए समय कैसे निकल जाता है पता नहीं चलता गैजेट्स के इस दौर पर इन चक्करों में कॉलेजों या दफ्तरों के लिए देर हो जाती है खुद को अपडेट रखने की कोशिश करते हुए भी बहुत सी जानकारियां ज्ञान खबरें छूट जाती हैं इस बारे में द नेचर ऑफ सक्सेस के लेखक मैप एंडरसन की माने तो रोजाना सिर्फ एक घंटा कोई नया काम सीखा जाए या किसी नए विषय का अध्ययन किया जाए तो सोच समझिए 5 वर्ष या उससे भी कम समय में आप उस काम या विषय के विशेषज्ञ बन जाएंगे बस आपको लगातार प्रयास जारी रखना होगा।

सिंपल टूथ के संस्थापक व लेखक मैप एंडरसन के मुताबिक समय प्रबंधन का एक तरह का अनुशासन है आज के समय में जैसे कंपनी की मार्केट वैल्यू है वैसे ही इंसान के व्यक्तित्व की गिनती है अगर रोजाना आप 1 घंटे में किसी किताब के 20 पढ़ने पड़ते हैं तो साल भर में आपके हजार पढ़ने और लगभग 18 ग्रंथों को पढ़ सकते हैं वास्तव में रोज के 1 घंटे के सही सकरातमक उपयोग से आप साधारण से असाधारण व्यक्ति बन सकते हैं निवेदिता हासिल करना पर्वतारोहण की तरह ही है जैसे जैसे आपकी ज्ञान का दायरा बढ़ता है आप ऊपर की सीढ़ियां चढ़ते हैं वैसे वैसे आपका नजरिया और सोच का दायरा व्यापक होता जाता है इससे आपके जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आता है जे कृष्णमूर्ति का कहना है कि ईश्वर एक बार एक ही जन्म देता है और दूसरा जन्म देने से पहले दिए हुए धन को वापस ले लेता है जबकि कवि रहीम ने लिखा है करत करत अभ्यास ते जड़मति होत सुजान


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आने के लिए धन्यवाद !!।सुविचार: एक घंटा रोजाना"




एक कोशिश है खुशी


कब से यहां आने की सोच रहे थे? सोचते थे कि वहां जाकर खुशी मिलेगी लेकिन यहां आने के बाद भी कोई खुशी महसूस नहीं हो रही।

खुशी तो एक लगातार कोशिश है वह कोई मंजिल नहीं है यह मानना है डॉक्टर सुजैन वाइट का कुआं मशहूर साइक्लोजिस्ट कौंसलर हैं नॉर्दन लियोन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं उनकी बेहतरीन किताब है टॉक्सिक फ्रेंडशिप नो इन द रूल्स एंड डीलिंग विथ फ्रेंडशिप ब्रेकअप डैम

हम अपने हाथ से अक्सर परेशान रहते हैं कभी हमें लगता है कि कोई बीता दौर था जब हम खुश थे फिर कभी सोचते हैं कि आगे यह होगा वह होगा तो हम खुश होंगे हमें खुशी मिलेगी अगर कभी हम पीछे मुड़कर देखते हैं तब कुछ समझ में आता है तभी हमें ठीक-ठाक अंदाजा नहीं था कि यही खुशी है इसी तरह आने वाले कल या किसी जगह सेक्स में कोई हम हम कोई खुशी तलाशते हैं आने वाले कल में हम कोई मंजिल तय कर लेते हैं कि वही जाकर खुशी मिलेगी हम जब वहां पहुंचते हैं तो अजीब बात है कि अक्सर खुश नहीं होते शायद उसकी वजह यह है कि हम अपने आज को खुशी से नहीं जोड़ते इसलिए आने वाले कल पर ज्यादा बात करते हैं मंजिल पर ज्यादा सोचते हैं हम रास्ते पर कम ध्यान देते हैं कोशिशों पर जोर नहीं देते हम में खुशियों का पल तलाशने की कोशिश करनी चाहिए यह जब हम तय कर लेते हैं तो मंजिल से ज्यादा रास्ते की परवाह करते हैं मंजिल तो मंजिल है वह एक पड़ाव है रास्ता तो हमारे संग संग ही चलता है हम लगातार कोशिश करते हैं और कोशिश अक्सर खुशी को पकड़ भी लेते हैं।


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मोह के धागे


हम कहते हैं कि मृत्यु सुखद है फिर भी मन में उसका भाई होता है और वह चेतन में यह बात जमी हुई है कि मृत्यु के समय मनुष्य को मर्मर तक पीड़ाओं से गुजरना पड़ता है शास्त्रों में भी कहा गया है कि मरण समान वयना नत्थी यानी मृत्यु के समान कोई वेदना नहीं है जब आदमी किसी भी सुन कष्ट से खुजराहो तो उसके मुंह से यही निकलता है कि मौत के मुंह से निकल आया है इस भाई का दूसरा बड़ा कारण है जीवन के प्रति अनंत में सभी प्राणियों को अपना जीवन प्रिय होता है सभी जीना चाहते हैं मरना कोई नहीं चाहता सब जीवन से चिपके हुए दिखाई देते हैं वृद्ध वृद्ध और रोगी से रोगी व्यक्ति उनके मन में भी मृत्यु के समय जीवन के लिए एक तरफ छटपटाहट देखी जाती है।

महावीर जी को अनंत मोहे अनंत मोह की संज्ञा देते हैं मनोवैज्ञानिक ने जीने की लालसा को जिजीविषा कहते हैं इसे मनुष्य की बुनियादी अंदर प्रेरणाओं में गिन गिना जाता है प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक एरिक वंश मनुष्य के तीन मूलभूत विश्वासों में प्रथम इसी अंतः प्रेरणा को मानते हैं अपने अस्तित्व की अमरता में विश्वास बढ़ने की अनिवार्य घड़ी को सामने देखकर भी मरने से डर ना उसी जिजीविषा की झलक है इसके पीछे एक कारण अज्ञात के प्रति आशंका भी है कि कहीं नरक में ना जाना पड़ जाए शरीर के मुंह की तरह परिवार का भी मुंह पैदा हो जाता है कि परिवार का क्या होगा वह गीता में कृष्ण कथन को भूल जाते हैं कि जो जन्मा है उसकी मृत्यु निश्चित है जैसे वस्त्र जीवन हो जाने पर मनुष्य नए कपड़े धारण करता है वैसे ही शरीर के जन्म होने पर आत्मा नए शरीर को धारण करती है|


मुझे उम्मीद है कि आपको यह सकारात्मक लेख  सकारात्मक सोच भाग 14:-मोह के धागे ,पसंद है अंदर की आवाज़ें अनसुना ना करें,सकारात्मक सोच भाग 13:-सन्यास से मिलता है सौंदर्य ताकि आप प्रेरित हो जाएं और अपने जीवन में मुस्कुराते रहें
आने के लिए धन्यवाद !!।





सन्यास से मिलता है सौंदर्य


"सन्यास वह घटना है जो मनुष्य के अंत कारण को सुंदर बना देती है यही कारण है कि सन्यासी कभी बुरा नहीं होता वह बिना किसी साज सिंगार के चिरयुवा रहता है"

जो सन्यास तुम्हें माया मुंह से छुड़ाकर करुणा दया से भी दूर कर देता हो समझना चूक गए भूल हो गई माया ममता से छुड़ाने का प्रयोजन ही इतना है कि तुम्हारी जीवन ऊर्जा करुणा बने

सन्यासी अपूर्व सुंदर हो जाता है संयास जैसा सौंदर्य देता है मनुष्य को और कोई चीज नहीं देती संन्यस्त होकर तुम सुंदर ना हो जाओ तो समझना कि कोई भूल चूक हो रही है सन्यासी का कोई श्रृंगार नहीं है सन्यास इतना बड़ा सिंगार है कि फिर किसी और सिंगार की कोई जरूरत नहीं है

तुमने देखा कि सांसारिक व्यक्ति भोगी है जवानी में शायद सुंदर होता हो लेकिन जैसे-जैसे बुढ़ापा आने लगता है आज सुंदर होने लगता है लेकिन उससे उलट घटना घटती है Sanyasi के जीवन में जैसे-जैसे सन्यासी विद्रोह होने लगता है वैसे वैसे और सुंदर होने लगता है क्योंकि सन्यास के कोई वृद्धा अवस्था होती ही नहीं सन्यास कभी बुरा होता नहीं सन्यास तो चीर युवा है।


 इसलिए तो हमने बुद्ध और महावीर की जो मूर्तियां बनाई है वह उनकी युवावस्था की बनाई है इस बात की खबर देने के लिए की सन्यासी चिरयुवा है हमने अपूर्व सौंदर्य से भरी मूर्तियां बनाई है महावीर और बुद्ध की उनके पास कुछ भी नहीं है ना कोई साज है ना सिंगार है कृष्ण को तो सुविधा है कृष्ण की मूर्ति को तो हम सजा लेते हैं मोर मुकुट बांध देते हैं रेशम के वस्त्र पहना देते हैं घुंघरू पहना देते हैं हाथ में कंगन डालकर मोतिया कहार लटका देते हैं पर बुद्ध और महावीर के पास तो कुछ भी नहीं है बुद्ध के पास तो एक चीज़ है जिसको उड़ा हुआ है महावीर के पास तो वह भी नहीं लेकिन फिर भी अपूर्व सौंदर्य है ऐसा सौंदर्य जिसको किसी भी सजावट की कोई जरूरत नहीं संसार तो छोड़ना है संसार की माया ममता भी छोड़नी है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि सन्यास कठोर बनाते तुम्हें कृष्ण बना दे तुम्हें कि तुम्हारे हृदय को पत्थर बना दे तब तो तुम जो गए अक्सर ऐसा होता है अक्सर तुम्हारे तथाकथित साधु सन्यासी और महात्मा जिस दिन मोह माया छोड़ते हैं संसार का उसी दिन दया माता दया करुणा भी छोड़ देते हैं यह तथाकथित सन्यासी रूखे सूखे लोग हैं उन्होंने माया मोह छोड़ी उसी दिन से वह डर गए हैं उन्होंने अपनी को सुख आलिया भट्ट के कारण वह हसीन हो गए हैं उन पर नए पत्ते लगते हैं नाम है फूल आते हैं इसलिए तो उनके जीवन में तुम्हें सौंदर्य दिखाना पड़ेगा उनके जीवन में एकरूपताव है मरुस्थल जैसे हैं झुक गए प्रश्न से थोड़ी ही विरोध था पतंजलि ने कहा ना रसोई वह सत्य तो रहस्यमय है वह परमात्मा तो रस भरा है Sanyasi रस से थोड़ी ही विरोध है इस संसार में व्यर्थ ना बरस दया बनकर बैठे करुणा बनकर बहे सेवा बनकर बहे रस तुम्हें भिखारी ना बनाए सम्राट बना है याद रखना बनाए दानी बनाए रस तुम लुटाओ रस तुम दो ।

इसलिए जो सन्यास तुम्हें माया मुंह से छुड़ाकर करुणा दया से भी छुड़ा देता हूं समझना छुप गए तीर निशाने पर ना लगा गलत जगह लग गया भूल हो गई माया ममता से छुड़ाने का प्रयोजन ही इतना है कि तुम्हारी जीवन ऊर्जा करुणा बने माया ममता छूट गई और करुणा बनी नहीं तो संसार भी गया और सत्य भी ना मिला तुम घर के ना बचे न घाट के तुम कहीं के ना रहे संसार छूट गया और सत्य मिला नहीं है बाहर का सौंदर्य छूट गया और भीतर का सौंदर्य मिला नहीं है अटक गए रसधार ही सूख गई मरुस्थल हो गए ज्यादा से ज्यादा कुछ कांटे वाले झाड़ पैदा हो जाते हो मरुस्थल में तो हो जाते हो बस और कुछ नहीं ।

ना ऐसे व्हिच पैदा होते हैं जिनमें किसी राहगीर को छाया मिल सके ना ऐसे व्हिच पैदा होते हैं कि रसदार फल लगे और किसी की भूख मिट सके ना किसी की च*** मिट्टी ना ही किसी की प्यास मिटती रूखे सूखे यह लोग और इनकी तुम पूजा किए चले जाते हो इनकी पूजा खतरनाक है क्योंकि इनको देख देख कर धीरे-धीरे तुम भी रूखे सूखे हो जाओगे ।

 इस देश में यह दुर्भाग्य खूब घटा इस देश का सन्यासी धीरे-धीरे जीवन की करुणा ० हो गया उसे करुणा ही नहीं आती लोग मरते हो तो मरते रहे लोग करते हो तो सर दे रहे वह तो कहता हमें क्या लेना देना हम तो संसार छोड़ चुके संसार छोड़े हो वह तो ठीक लेकिन करुणा छोड़ चुके तो फिर तुम बुद्ध की करुणा ना समझोगे महावीर की अहिंसा ना समझोगे और क्राइस्ट की सेवा न समझोगे इसे कसौटी मानकर चलना करुणा बन्नी ही चाहिए तो ही समझना कि सन्यास ठीक दिशा में यात्रा कर रहा है|

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कैसा विकास कैसी आधुनिकता


"ख्वाइशों का खांड ववन " एक लड़की के नजरिए से सम कालीन जनजीवन की एक दिलचस्प दुविधा को बारीकी सिंह उजागर करता है आज गांव में रहने वाली आबादी महानगरीय आधुनिकता से प्राया अनजान नहीं है वह इस आधुनिकता के स्थूल उपादानों के प्रति खांसी आकर्षित है इन उपादानों को वह गांव के पिछड़ेपन और फटेहाली से मुक्ति का जरिया समझती है लेकिन उसकी जितनी गति इस आधुनिकता के उपादानों को अपनाने में है इतनी सदियों से उनके जीवन में जड़ जमाए बैठे जड़ताओं और रूढ़ियों को उखाड़ फेंकने में नहीं दिखाई पड़ती इस विशिष्ट परिस्थिति में ग्रामीण जनजीवन एक अजीबोगरीब विद्रूप तैयार करता नजर आ रहा है यह उपन्यास इसी विद्रूप को हमारे सामने रखता है और सवाल उठाता है देश की राजधानी के गांव की यह कौन सी आधुनिकता है जहां आंगन में बड़ी-बड़ी गाड़ियां तो आ गई पर बहुओं के लिए एक नर्मदा हवा तक घरों में दाखिल नहीं हो पाई इस उपन्यास में जिस गांव का चित्रण हुआ है वह महानगर से बिल्कुल लगा हुआ है इसलिए वहां इस कथित आधुनिकता का विद्रोह और आसानी से दिखाई देता है महानगर का विस्तार इस गांव को ग्रस्त आ जा रहा है और वह धीरे-धीरे अपने वजूद खोता जा रहा है लेखिका इस विघटन के हवाले से विकास की बहू पर इशिता और लोकलुभावन अवधारणा पर सवाल खड़े करती है सवाल यह है कि क्या बादलों का बदलना भर ही विकास है या की मानसिकता में बदलाव लाए बगैर हम वास्तव में विकसित नहीं हो सकते ।



 उपन्यास की प्रमुख पात्र अपने जीवन संघर्ष में ऐसी अनेक अनेक प्रेषित परिस्थितियों वर्जनाओं का सम्मान करती है साथ ही अपने सपनों को सच करने की दिशा में कदम बढ़ाती है यह यात्रा केवल अपनी अस्मिता को पानी की नहीं बल्कि समाज को दिशा देने की यात्रा भी है



मुझे उम्मीद है कि आपको यह सकारात्मक लेख सकारात्मक सोच  भाग 12 :-कैसा विकास कैसी आधुनिकता पसंद है अंदर की आवाज़ें अनसुना ना करें ताकि आप प्रेरित हो जाएं और अपने जीवन में मुस्कुराते रहें


    प्रभु का प्रेम ही स्थाई प्रेम


जीवन में खुश रहने के लिए यह आवश्यक है कि हम स्थाई प्रेम से भरपूर रहे सदा सदा का प्रेम केवल प्रभु का प्रेम है जो दिव्य व आध्यात्मिक प्रेम है जब हम हम इस दुनिया में दूसरों से प्रेम करते हैं तो हम इंसान के बाहरी रूप पर ही केंद्रित होते हैं और हमें जोड़ने वाले आंतरिक प्रेम को भूल जाते हैं सच्चा प्रेम तो वह है जिसका अनुभव हम दिला दिलसेदिलतक और आत्मा से आत्मा तक करते हैं बाहरी रुप तो एक आवरण है जो इंसान के अंदर में मौजूद सच्चे प्रेम को ढक देता है ।


जब हम किसी इंसान के बारे में कहते हैं मैं तुमसे प्रेम करता हूं तो हम उस व्यक्ति के साथ रुप से प्रेम प्रकट कर रहे होते हैं बाहरी आवरण या हमारा शारीरिक रूप वह नहीं है जिससे हम वास्तव में प्रेम करते हैं वास्तव में हम उस व्यक्ति के सारे से प्रेम करते हैं जो आप उसके भीतर मौजूद है।


हम यह कैसे जान सकते हैं जीवन के दौरान इंसान में कितने सारे बदलाव आते हैं शुरू में उसका आकार एक नन्हे शिशु का होता है फिर वह बालक के रूप में स्कूल जाने वाला बच्चा बनता है किशोर से व्यस्क बनता है व्यस्क से 30 40 50 60 70 80 90 और 100 वर्ष की आयु को पार करता है हम किसी व्यक्ति से अपने जीवन की संपूर्ण अवधि के दौरान प्रेम कर सकते हैं चाहे उस व्यक्ति का बाहरी रूप लगातार बदल रहा होता है उसकी आयु लगातार बढ़ रही होती है आंसर में उस बाहरी आवरण के भीतर वह इंसान होता है जिससे हम प्रेम करते हैं रहस्य यह है कि हम उस व्यक्ति के साथ से प्रेम करते हैं हम उस व्यक्ति के मूल स्वरूप से प्रेम करते हैं और वह मूल आत्मिक स्वरुप स्वयं प्रेम ही है हमारे जीवन का उद्देश्य यही है कि हम अपने सच्चे आत्मिक स्वरुप का अनुभव कर पाए और फिर अपनी आत्मा का मिलाप उसके स्रोत परमात्मा में करवा दें इस उद्देश्य की प्राप्त करने में संत वह महापुरुष हमारी सहायता करते हैं गुरु के मार्गदर्शन में नियमित ध्यान अभ्यास करते हुए हमारी आत्मा आध्यात्मिक मार्ग पर प्रगति करती जाती है औरत परमात्मा में जाकर लीन हो जाती है आइए हम सभी अपने बाहरी शारीरिक रूप की ओर से ध्यान हटाए और अपने सच्चे आत्मिक स्वरुप का अनुभव करें तभी इस मानव काया में आने का हमारा लक्ष्य पूर्ण होगा और हम सदा सदा के लिए प्रभु में लीन होने के मार्ग पर अग्रसर हो पाएंगे।

मुझे उम्मीद है कि आपको यह सकारात्मक लेख पसंद है अंदर की आवाज़ें अनसुना ना करें ताकि आप प्रेरित हो जाएं और अपने जीवन में मुस्कुराते रहें|


तीन टांग की दौड़ में दो आदमी

आप और आदमी में एक बड़ी समानता यही है कि दोनों जितना तपंगे उतना ही पकंगे ।

हे मेरे प्रिय आम आदमी या तो तू आम बना रहा यह सिर्फ आदमी। गठजोड़ मत कर आदमी आदमी होता है आम नहीं होता इसी तर्ज पर कोई आम आदमी की तरह नहीं होता कभी-कभी मजबूर सही होता है पता गलत कभी इसके उल्टा चौपाया बना रहा गरुड़ मत बंद जटायु मरण से पहले सीता हरण तो  होने दे । टोपी उतार सिर खुजा खून के झूठ मत भी बचा कर रख कुछ और पीले नदी में कूदने के लिए कपड़े उतारना जरूरी नहीं होता

हे आम हे आदमी अभी भी पिलपिला मत हो चुनाव करीब है गुठली में गुदा बनने दे कोयल की बोली की मिठास बटोरता रह । नेताओं के काम आएगी। आम और आदमी में समानता यही है कि जितना तपंगे उतना पकंगे । बगैर शोषित दलित बन जाना तो आदमी की फितरत है गंजे सिर पर चोटी रखने से आदमी चाणक्य नहीं हो जाता यदि आप शरीर है तो गुठली उसकी आत्मा यह गीता में सार नहीं है मेरा सारा है

है आदमी तू बच्चा है गलत संगत में पड़ बड़ा होकर तुझे राजनीति में जाना ही है मतदान का फल देने वाले को नहीं लेने वाले को मिलता है असली उपवास तो भूखे लोग ही रखते हैं अरे भैया कौन नहीं जानता कि संपन्नता सी जाति बदल जाती है एकता में विभिन्नता अक्सर भिनभिनाती लगती है सूखे पेड़ को छोड़कर हरी-भरी डाल को काटने वाले आदमी जरूर नहीं है कि भूतपूर्व कालिदास हो इसके लिए हमारा वन विभाग भी तो है ।

है आदमी तुझे चुनावों से डरना नहीं चाहिए लोकतंत्र की राजनीति में चुनाव से पहले का ललित युद्ध समझो चुनाव का पूर्वाभ्यास होता है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग केवल आदमी ही नहीं पाकिस्तान में भी करता है वहां की संसद के आगे कोई भी आतंकवादी हमें गाली दे सकता है आप चिंता ना करें हाथ में दस्ताने पहनकर अभी भी वोट डालने का अभ्यास शुरू कर दे प्रैक्टिस मैक्स ए मैन परफेक्ट|

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तनाव मुक्ति की राह



इन दिनों दुनिया भर में मानसिक बीमारियां बढ़ रही हैं पर इनकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है रोग का इलाज हो जाता है लेकिन मनोवृति से कोई दूसरा छुटकारा नहीं दिला सकता मन गलत कामों का जिम्मेदार होता है तो अच्छे भी करवाता है यह ऐसी समस्याएं हैं जिनका हल हमें खुद ही ढूंढना पड़ता है लेकिन हम हल ढूंढने की बजाय तनाव को जीवनसाथी की तरह अपना लेते हैं किसी भी शारीरिक मानसिक या भावनात्मक चुनौती के उद्दीपन का जवाब तनाव ही होता है इसमें हंसकर हर कोई खुद को व्यस्त रखता है कुछ तो यह कहते हैं कि डेडलाइन के तनाव में काम अच्छा हो जाता है यह समझना जरूरी है कि निरंतर तनाव शोर प्रदूषण और काम का दबाव कमजोर होते रिश्ते हर समय थका शरीर कहां तक जूझने की ताकत रख सकता है ?

Amsterdam के ड्रग रिसर्च सेंटर ने यह साबित कर दिया है कि तनाव से व्यक्ति को छोटी बात बड़ी लगने लगती है शांत व्यक्ति हिंसक तक बन सकता है मन और अहम व्यक्ति को चिंता में डाले रहते हैं क्योंकि वह हारना नहीं चाहते मनोविज्ञान का सुझाव है कि ऐसे में जीवन में बदलाव लाया जाए जो यह समझ लेगा कि लगातार तनाव नुकसानदायक है और जो उससे बचने की कोशिश करेगा वह ना सिर्फ खुद को स्वस्थ करेगा बल्कि अपने आसपास भी बेहतर इलाज सकेगा इसके लिए सबसे जरूरी यह है कि हमें अपने रिश्तो में मजबूती लानी होगी इस इनके सहारे खुद पर विश्वास बढ़ेगा दूसरों में दोष देखने और हर समय की होड़ से छुटकारा भी मिलेगा यह लंबी प्रक्रिया है जिसका कोई शॉर्टकट नहीं है।


मुझे उम्मीद है कि आपको यह सकारात्मक लेख सकारात्मक सोच की शक्ति भाग 16:- तनाव मुक्ति की राह(in hindi) पसंद है अंदर की आवाज़ें अनसुना ना करें ताकि आप प्रेरित हो जाएं और अपने जीवन में मुस्कुराते रहें


अंदर की आवाज को अनसुना ना करें


आम बोलचाल की भाषा में अंदर की आवाज और अंग्रेजी में गट फीलिंग को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए इनका हमारे मूड और फैसलों पर काफी गहरा प्रभाव होता है

नए अध्ययन में साबित हुआ है कि यह संकेत हमें खतरनाक परिस्थितियों से बचाते हैं फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी में हुए शोध में विशेषज्ञों ने बताया कि गट फीलिंग हमारे शरीर के बचाव तंत्र का हिस्सा है यह हर हालात में हमें धैर्य रखने के लिए प्रेरित करता है न्यूरोसाइंटिस्ट और प्रमुख शोधकर्ता डॉ लिंडा रीना मन का कहना है कि gastrointestinal tract हमारे शरीर की सतह की त्वचा से सौ गुना बड़ी है यह मस्तिष्क को शरीर के किसी और अंग के मुकाबले अधिक तेजी से संदेश भेजती है और गलतियां करने से रोकती है पेट और मस्तिष्क के बीच इस विचित्र संबंध को अभी तक तकनीकी तौर पर समझा ही नहीं गया है|

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10 anmol vachan in hindi 


प्रार्थना का सच


सदियों से मनुष्य जाति ने जीवन जीने के दो तरीके अपनाए उनमें प्रार्थना को भी शामिल किया प्रार्थना इसलिए नहीं कि ईश्वर एक सर्वशक्तिमान सकता है इसकी विराटता भाई का कारण नहीं प्रेम और श्रद्धा का विषय है जो हम से श्रेष्ठ है वह हमें हमारी श्रद्धा का और जो सम्मान है वह हमारी प्रियता का अधिकारी है हमारी प्रार्थनाएं एक भावाकुल संवाद की तरह प्रकट हुई है हमारे यहां प्राचीन वैदिक विचार हैं जो ईश्वर के लिए गाई गई है प्रार्थनाएं मंत्र के रूप में भी रची गई है संस्कृत श्लोकों में आदि शंकराचार्य और साधकों संतो व कवियों के अनेक सतवन अत्यंत मनोहारी हैं गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि मैं बैंकॉक या योगियों के हृदय में निवास नहीं करता मैं तो वहां होता हूं जहां भक्त मेरा गान करते हैं ।

संसार के सभी धर्मों सभी भाषाओं में प्रार्थना को महत्व मिला है हम इश्वर से कुछ ना कुछ चाहते हैं हम दुख से मुक्ति चाहते हैं सुख धन स्वास्थ्य और बाधाओं के प्रशमन की कामना करते हैं हमारी प्रार्थनाओं के मूल्य में भौतिक इच्छाएं प्रबल हो जाती हैं लेकिन सभी साधकों ने प्रार्थना के केंद्र में आता था और शरणागति को महत्व दिया है शरीर का रोमांच आंख के असूल गदगद वाणी और विषय कल्याण की भावना ही प्रार्थना के बीज भाव है

 प्रार्थना सात्विक भाव के उदय से फलीभूत होती है हमारे यहां मंत्र जप में अजपा जप को बड़ा महत्व मिला है जब मोहन भाव से हो या और थोड़े ही ले या उच्चरित हो अपने और सब के कल्याण के लिए अपशब्द या मौन प्रार्थना रोम-रोम से की गई प्रार्थना सबसे मूल्यवान है|


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आग जलनी चाहिए

ऋग्वेद का पहला मंत्र अग्नि मिले पुरोहितं देवता के रूप में अग्नि की स्तुति करता है यही अग्नि शक्ति बनकर यज्ञ में जलती है अग्नि मानव सभ्यता की आरंभिक खोज है यह शरीर में ताप बनकर भूख में जठरानल समुद्र में वर्ण बागी और वन में दावानल बनकर सुलग उठती है यही आग क्रोध में भस्म करती है तो करुणा में दर्वित कर देती है दिनकर बार-बार अग्नि की चर्चा करते हैं तुम एक अनल कन हो केवल या उर्वशी मैं इस आपको दे दूं कहां पर आदि आपका चित्ताकर्षक नील लोहित अर्पित रूप कई आकृतियां गढ़ता है इसकी लो सदा ऊपर उठती है सौंदर्य शास्त्रियों ने एस्थेटिक्स द्वारा इसे सब्लिमेशन या उदात्तीकरण माना है किसी गृहिणी के चूल्हे में जलती हुई आग कम मूल्यवान नहीं होती उपनिषदों ने जिन अन्य को ब्रह्मा कहा है वह यही पता है दिन में सूर्यताप देता है तो रात में अग्नि उस का प्रतिनिधित्व करती है भीतर आंख छुपी हुई है हर वृक्ष अग्नि का मूर्तिमान रूप है उसके फूलों और फलों में अग्नि का ही रंग सुलग रहा है आग क्रांति की मशाल भी है दुष्यंत कहते हैं मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए| आग की मित्रता हवा से है वेदों के 49 मरुत ही उन्चास पवन हैं मरुत का अर्थ ही है आग और हवा कालिदास के रघुवंश में राजा दिलीप अग्नि की तरह लिप्त हैं इसलिए वन में हवाएं लताओं को हिला कर उन पर नगर की कन्याओं की तरह फूल बरसाती हैं


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जीवन का संगीत



कहते हैं कि अल्बर्ट आइंस्टाइन को यह अंदेशा था कि तकनीक का विकास मनुष्य को अमानवीय बना सकता है लोग इसके इतने गुलाम हो जायेंगे कि मानवीय मूल्यों को भूल जाएंगे मोबाइल व कंप्यूटर ने जिस तरह लोगों पर कब्जा कर लिया है उसे देखते हुए यह अंदेशा सच साबित हुआ है तकनीक के उपयोग की बौद्धिक कुशलता हमने पाली है पर मनुष्य में जिस तरह आईक्यू होता है उसी तरह इफ यू यानी इमोशनल quotient भी होता है यानी भावनाओं को मापने का तरीका


तकनीक के उपयोग के लिए बुद्धि का उच्च स्तर जरूरी है पर जीवन की परीक्षा पास करने के लिए भावनाओं को नियोजित करने का गुण जरूरी है अक्सर देखा जाता है कि कॉलेज में अच्छे नंबरों से उत्तीर्ण होने वाले जीवन की परीक्षा में सफल नहीं दिखते क्योंकि बुद्धि और भाव को विकसित करने के तरीके बिल्कुल अलग अलग हैं

इस विषय पर अमेरिकी मनोवैज्ञानिक डेनियल गोलमैन अनुसंधान किया है उनका कहना है कि जीवन में 20 फ़ीसदी सफलता आईक्यू से मिलती है जबकि 80 ई- क्यू के कारण संबंध निभाने और जीवन में आने वाली हार जीत से तालमेल में ई- क्यू ही काम आती है भावनाओं को समझ कर उनमें निहित ऊर्जा का रचनात्मक उपयोग करना एक खास तरह का परीक्षण होता है जो शिक्षा संस्थानों में नहीं दिखाया जाता जिनका क्यों कम होता है उनका जीवन परेशानियां गिनने में ही कट जाता है मनुष्य एक समन्यव है विभिन्न केंद्रों का जिसमें शरीर बुद्धि भाव और आत्मा सब हैं यह सारे केंद्र जब एक दूसरे से तालमेल रखते हैं एक सुरीला संबंध विकसित करते हैं कभी जीवन की लय बनती है|



मुझे उम्मीद है कि आपको यह सकारात्मक लेख पसंद है,सकारात्मक सोच भाग 7:-जीवन का संगीत , अंदर की आवाज़ें अनसुना ना करें ताकि आप प्रेरित हो जाएं और अपने जीवन में मुस्कुराते रहें

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जिंदगी उसी की है

जिंदगी कैसी हो इनके जवाब कई हैं एक अच्छा जवाब यह है कि अपने होने में दूसरे का होना और दूसरों के होने में अपना होना अनिवार्य है यह हो सकता है कि उनका जीवन अज्ञात सा हो यह भी है कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी फाकाकशी में गुजरी हो दूसरों के लिए जीने वाले लोग अकेले हो कर भी स्वयं सेवकों की फौज की तरह होते हैं वह अकेला चलो रे की धुन पर चलते हैं पर सबके लिए चलते हैं वह अकेला चलो रे की धुन पर चलते हैं पर सबके लिए चलते हैं चीन संस्कृतियों में ऐसे लोग जितने ज्यादा होते हैं उनकी जड़ें उतनी ही गहरी होती हैं हम भारतीय इस मामले में काफी आगे हैं यहां अयं निज परो वेति गन्ना लघुचेतसाम् उदारचरितानां तु वसुदेव कुटुंबकम की भावना आधार में रही है हम मानते हैं कि यह अपना है वह पराया ऐसी गणना छोटी बुद्धि वाले मनुष्य क्या करते हैं जो उधार प्रकृति के लोग हैं वह धरती पर रहने वाले सभी लोगों को अपना परिवार मानते हुए परिवारिक व्यवहार करते हैं यह अमेरिकी दर्द दार्शनिक कवि हेनरी डेविड थोरो की विख्यात कृति वार्डन पढ़नी चाहिए वार्डन जंगल के बीच एक सरोवर है जिसके किनारे थोरो झोपड़ी बनाकर दो साल मेहनत मजदूरी करते रहे हैं वह विचरते रहे जंगलों में और विचार करते रहे आखिर यही पाया कि जी ना वही है जो सहज है सरल है प्रकृतिस्थ है चोरों ने जंगल में जो पाया उसी पर वल्डन लिखी उन्होंने कहा कि किताब इसलिए लिखी कि दूसरे मेरे हासिल से कुछ हासिल करें आधुनिक साधने भी साफ कर दिया है कि मन वचन और काया से जो दूसरों की मदद करते हैं वह ज्यादा स्वस्थ होते हैं उनमें तनाव कम होता है|


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10 anmol vachan in hindi 

अभावों के आगे जीवन



जिंदगी भरी -पूरी हो ,यह सभी जांच चाहते हैं ।यह चाह उतनी ही स्वाभाविक है , जितना यह सत्य की यह कभी भी भरी-पूरी नहीं मिल सकती। अभाव यहां शाश्वत तौर पर मौजूद है । अभावों के प्रति हमारा नजरिया और उसके साथ हमारी तारतम्यता ही तय करती है कि हम जिंदगी को किस तरह से लेते हैं ? अभाव में कुछ भी बुरा नहीं। हां , उसके आगे नतमस्तक होकर बैठ जाना गलत है । अभाव को दूर करने की हमारी कोशिश , दूसरे के अभाव को भी समझना, अभाव को व्यक्तित्व को मानने वाले तत्व की तरह लेना ही हमें परिपूर्ण बनाता है ।

हमें कभी यह भी नहीं भूलना चाहिए किए का भाव की पूर्ति के बाद हमेशा दूसरे अभाव का जन्म हो सकता है । प्रख्यात नृत्यांगना इजा डोरा डंकन के शब्दों में - " अभाव हमें माजता है निखारता है, निखारता है जीवन का मर्म और उसका सौंदर्य समझता है अपनी कामयाबी पर उन्होंने लिखा - मैं बचपन में मिले अभाव और समस्याओं को विशाल पहाड़ की शुक्रगुजार हूं, उनके बीच उनके बीच पलते हुए मुझे जिंदगी की जंग जीतने का हौसला मिला" । माना जाता है कि अभाव के अनुभव ही आप को आगे ले जाते हैं यह आप को संवेदनशील बनाते हैं । महान फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो अभावों को सपने हासिल करने का जरिया बनाया । वह हर अभाव को परे झटकते और अपने लक्ष्य पर नजर टिकाए रहते । एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन में नए जूते नहीं मिलने और इस चीज ने उन्हें आज तक संवेदनशील बनाए रखा है । वे कहते हैं कि बचपन के पुराने जूते आज भी कभी-कभी सपने में आते हैं । शायद यह याद दिलाने के लिए की उनका अतीत आज भी दूसरों की हकीकत है।


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ट्रेन में अक्सर देखा जाता है है कि दो अनजाने मिलते हैं अनायास बा कोई बात छेड़ने जाते हैं और फिर उनका सफर आसान हो जाता है लंबी दूरी छोटी हो जाती है बात करना तो एक बहाना होता है असल में वह सामने वालों से घुलना मिलना चाहते हैं आखरी कोई कोई तो बहाना तो बातें करने का दरअसल बात करना जरूरी है घुलना-मिलना और भी जो बात करने में उस बात नहीं होते वह पीछे रह जाते हैं जब अपनी किताब हाउ टू कूल डाउन ऑफ डेडिकेशन में कहते हैं

  1. नजरें चुराना
  2. दूर कोने में खड़े रहना
  3.  बाय बांध कर रखना 
  4. वह चीजें जो आपकी बड़ी बाधा हैं 


इनसे बचने में समझदारी है इसका अर्थ यह नहीं है कि आप ज्यादा बोले संतुलन जरूरी है है जरूरत से पहले वह जरूरत से ज्यादा बोलना सामने वाले आपके प्रति कंकाल बन जाते हैं बातचीत में सामने वालों को समान रुप से तवज्जो दिया जाना चाहिए रिश्तेदार जिन्होंने हाउ टू आवड फायरिंग टेक्सटाइल कहती है कि कहती है अब अब तो नियुक्ति नौकरी में रखने से पहले ऐसे सवाल पूछने लगे जो चौकीदार लिफ्ट में आधी आधी से आपके व्यवहार से जुड़ा होता है वह जानना चाहते हैं कि उन बातों में आप एक्सपर्ट हैं कि नहीं जिनके बिना भी आपका काम चल सकता है वह चाहते हैं कि आप में बातें करने की बातों की क्या कीमत है इसे समझने के लिए ऐसा साहित्यकार सीखे की कहानी याद आती है उस कहानी में एक बूढ़ा तांगेवाला अपनी कहानी सुनाना चाहता है पर कोई सुनना नहीं चाहता है आखिरकार वह अपने जीवन बेटे की मौत की दुखद कहानी अपने घोड़े से कहता है


आंत्रप्रेन्योरशिप स्टार्टअप की राह:-


"यह आलेख आंत्रप्रेन्योरशिप स्टार्टअप की राह यहां है कि मैं किसी भी स्टार्टअप को प्रबंधित करने के लिए 8 बिंदु साझा कर रहा हूं जो आपकी स्टार्टअप कॉमपैनी, स्टार्टअप या स्टार्टअप और स्टार्टअप विचारों की आपकी टीम, काम और क्षमता को समझने में आपकी सहायता करता है। आप उद्यमिता की विशेषताओं को सीख सकते हैं, और आप सीख सकते हैं कि कैसे स्टार्टअप के लिए अपने कर्मचारी को किराए पर लेने के लिए, अपने स्टार्टअप में अपने सहकर्मी को कैसे प्रबंधित करें। इस लेख को पढ़ने के बाद आप आसानी से स्टार्टअप और उद्यमिता के तरीके को समझ सकते हैं।"आंत्रप्रेन्योरशिप स्टार्टअप की राह:-उद्यमिता और स्टार्टअप के लिए शीर्ष 8 जरूरी बिंदु जो आपके स्टार्टअप को बढ़ावा देता है"

आंत्रप्रेन्योरशिप स्टार्टअप की राह:-   "यह आलेख आंत्रप्रेन्योरशिप स्टार्टअप की राह यहां है कि मैं किसी भी स्टार्टअप को प्रबंधित करने के लिए 8 बिंदु साझा कर रहा हूं जो आपकी स्टार्टअप कॉमपैनी, स्टार्टअप या स्टार्टअप और स्टार्टअप विचारों की आपकी टीम, काम और क्षमता को समझने में आपकी सहायता करता है। आप उद्यमिता की विशेषताओं को सीख सकते हैं, और आप सीख सकते हैं कि कैसे स्टार्टअप के लिए अपने कर्मचारी को किराए पर लेने के लिए, अपने स्टार्टअप में अपने सहकर्मी को कैसे प्रबंधित करें। इस लेख को पढ़ने के बाद आप आसानी से स्टार्टअप और उद्यमिता के तरीके को समझ सकते हैं।"
यह छवि के बारे में है,आंत्रप्रेन्योरशिप, स्टार्टअप, उद्यमिता और स्टार्टअप

हम लोग बहुत बार स्टार्टअप की शुरुआत में ढेर सारी गलतियां कर देते हैं और इस गलतियां इस गलतियों को सुधारने का मौका हमें बाद में भी नहीं मिल पाता है इस कारण हम वो हमें इस गलती इस गलती को कैसे दूर करें और यह गलतियां दोबारा ना हो स्टार्टअप में उसके लिए कुछ यहां कुछ मुख्य बिंदु दिए गए हैं ताकि आप अपने स्टार्टअप की जोड़ा है और उसमें जो बाधाएं आ रही है उसे दूर भगा सके और एक सक्सेसफुल स्टार्टअप बनाते बनाते हैं किसी भी स्टार्टर के पनपने की शुरुआती हाल हालात काफी अहम होते हैं कंपनी से जुड़े 12 गलत फैसले लंबे समय तक प्रभावित करते हैं ऐसे में कुछ खास गलतियां से बचाव व्यवसाय के लिए आज में से बेहतर होगा

उद्यमिता और स्टार्टअप के लिए शीर्ष 7 जरूरी बिंदु जो आपके स्टार्टअप को बढ़ावा देता है

इन बिंदुओं पर खासकर ध्यान दें ताकि यह गलतियां दोहराए हां या ना जा सके स्टार्टअप में पहला सह-संस्थापक के साथ रखे पारदर्शिता :-

मतलब अपने को फाउंडर के साथ रखें ट्रांसपेरेंसी अगर कंपनी में सब संस्थापक हैं तो आपसी सामंजस्य के लिए हर कदम पर पारदर्शिता का ध्यान रखना चाहिए नुकसान नुकसान फायदे से जुड़ी हर बात सहसंस्थापक की जानकारी में होनी चाहिए दूसरा शुरुआत में टीम को छोटी

जवाब शुरुआत कर रहे हैं कोई भी स्टार्टअप तब आप को शुरुआती में 5 या 5 से ज्यादा से ज्यादा टीम की जरूरत नहीं होनी चाहिए स्टार्टअप की शुरुआत में टीम को बढ़ाना बनाएं बजट हुआ जोखिम को ध्यान रखते हुए फैसले ले समय के साथ कार्य के बढ़ते दायरे के अनुसार ही टीम विस्तार करें तीसरा कर्मचारियों के चयन में रहें सतर्क आंत्रप्रेन्योर कई बार बिना पद के निर्धारण के कर्मचारियों का चयन कर लेते हैं उन्हें आगे इसकी इसकी वजह से स्टाफ के प्रबंधन में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है टीम में उन लोगों को चुने जो स्टार्टअप के उद्देश्य का सम्मान करते हो और परस्पर तालमेल के अभाव अभाव से कार्य क्षमता प्रभावित होती है इस कारण आप जब भी चयन करें तो बहुत सोच और समझ कर करें चौथा और बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंट बहुत महत्वपूर्ण महत्वपूर्ण पॉइंट धैर्य के साथ आगे बढ़े
काम की शुरुआत में सफलता व लाभ की उम्मीद करना और परिपक्व सोच है उद्यमी को कई मुश्किल पढ़ाओ के के बाद सफलता मिलती है इस कारण अपना धैर्य नाक हुए और धैर्य को बनाए रखें और जो धैर्य बनाए रखने से आपको आपको और आपके बिजनेस को बहुत सारे फायदे हो सकते हैं पांचवा लक्ष्य को अस्पष्ट रखें मतलब कोल को क्लियर रखें स्पष्ट योजना और बाजार को समझे बिना भी क्षेत्र में कदम ना रखें बाजार की समझ व पहले से बनाई योजनाओं आने वाली दिक्कतों को संभालने में मदद करेगी छठवां समाधान पानी में ना करें देरी किसी भी समस्या को हल्के में ना लें उसे देर रात तक ना डालें उन का तुरंत समाधान ढूंढने अक्षर आगे जाकर यही समस्या बड़ी हो जाती है तब आपको समाधान नहीं मिल पाते हैं तब उसी वक्त धैर्य खोने लगता है आपका सातवां वित्तीय सावधानियां भले ही आप अपनी कंपनी के रचनात्मक व मार्केटिंग पहलू से जुड़े हुए हो लेकिन आर्थिक मामलों की समझ बेहद जरूरी है ताकि आप किसी तरह के धोखे से बच सकें आठवां और आखिरी बिंदु खामियों से सीखें लगातार मिलती सफलता का दोस्त सिर्फ अपने असफलता का दोस्त सिर्फ अपने संस्थापकों और या को फाउंडर को देते रहने की वजह अपनी गलतियों को स्वीकार स्वीकार है और उन गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़े यह यह बिंदु बहुत ही महत्वपूर्ण है यह हमेशा लोग इस पर गलतियां करते हैं और इससे कुछ नहीं सीखते हैं लेकिन आपको ऐसा नहीं करना है आपको अपनी गलतियों से सीखना है और उस गलतियों को मानना भी है

मुझे आशा है कि आपको इस लेख को आंत्रप्रेन्योरशिप स्टार्टअप की राह ,उद्यमशीलता  स्टार्टअप विचारों और इसके तरीकों के बारे में पसंद आएगा और उद्यमिता और स्टार्टअप के लिए शीर्ष 7 जरूरी बिंदु यह जो आपके स्टार्टअप को बढ़ावा देता है आपको अपनी स्टार्टअप कंपनी को बढ़ाने में मदद करता है

धन्यवाद

10 anmol vachan in hindi 

बुराई को  काटना 

जीवन में अक्सर ऐसे अवसर आते हैं, जब जरा सी लापरवाही भारी पड़ जाती है। हम मन ही मन सीझते रहते हैं , भुनभुनाते रहते हैं । सोचते हैं वह काम दूसरी तरह से करते , तो अच्छा होता । विश्वप्रसिद्ध लाइफ कोच डेल कार्नेगी ने सफलता प्राप्त करने से पहले ऐसी कई ठोकरें खाई । फिर उनकी मुलाकात सांडर्स से हुई , जिन्होंने अपने एक अध्यापक की बात से व्यवहारिक जीवन का पाठ समझाया । एक दिन वह एक गिलास में दूध की एक बोतल लेकर आए और नीच के किनारे रख दी । फिर वह उठे और हम सबके सामने बोतल सिंक में फेंक दिया और चिल्ला कर -बोले गिरे हुए दूध पर रो मत , दूध और बोतल नष्ट हो चुके हैं । दुनिया की कोई ताकत उसे वापस नहीं ला सकती थोड़ा ध्यान दिया जाता तो यह बस जा सकता था , पर देर हो गई । अब इसे बुलाकर अगला काम करना चाहिए।

नकारात्मक आदत कैसे छोड़ें

इसी प्रसंग में फील्ड फिया bulletin के
sampadak का कथन उल्लेखनीय हैं । एक बार कॉलेज के स्नातकों को संबोधित करते हुए उन्होंने पूछा - तुम में से कितने लोग हैं , जिन्होंने आरी से लकड़ी काटी है ? बहुत से छात्रों ने हाथ खड़े किए ।
फिर उन्होंने पूछा -

कितनों ने बुरादे को काटा ?
इस बार कोई हाथ नहीं उठा । फिर उन्होंने बहुत पते की बात कही - जाहिर है , तुम बुरादे को काट नहीं सकते । वह तो पहले से ही कटा हुआ है । अतीत पर भी यही लागू होता है यानी जो बीत चुका है, उसके बारे में चिंता करना बुरादे को दुबारा काटने जैसा है । तो आंसू क्यों भाई जाएं? हमसे गलतियां हो जाती हैं । मूर्खता के काम कर लेते हैं, तो क्या हुआ? कौन नहीं करता ? इसलिए पिछला सब भूल कर नहीं लकड़ी काटो ।



मुझे आशा है कि आपको यह लेख  बुराई को  काटना  ,सकारात्मक सोच  भाग 1 पसंद आएगा और आप इस आलेख से थोड़ी सी यात्रा के लिए सीखेंगे,मुझे उम्मीद है कि आपको यह सकारात्मक लेख पसंद है सकारात्मक सोच भाग 10:-प्रार्थना का सच ताकि आप प्रेरित हो जाएं और अपने जीवन में मुस्कुराते रहें

आने के लिए धन्यवाद !!।सकारात्मक सोच भाग 9 :- अंदर की आवाज को अनसुना ना करें,      
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